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“गाय का मूत्र पीने वालों, हम मुसलमान हैं.. देखो हमारे हाथों में मौला आलिया का झंडा है”. “धर्मनिरपेक्ष” भारत के लिए ये “इस्लामिक” मुल्क के मंत्री का संदेश है

सवाल अब ये भी खड़े होने शुरू हो चुके हैं कि क्या तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की सीमा भारत के बाहर जाते ही समाप्त हो जाती है ? कल्पना कीजिये कि अगर यही बयान भारत के सेकुलर नेताओं द्वारा निर्मित धर्मनिरपेक्ष भारत के किसी नेता ने दिया होता तो क्या हो रहा होता अब तक . क्या बुद्धिजीवी अपना पुरष्कार वापस न कर रहे होते या अब तक उस मंत्री के खिलाफ कार्यवाही की मांग ले कर खुद भारत का ही कथित लिबरल वर्ग न उतर गया होता .

लेकिन ऐसा हुआ है पाकिस्तान में . ज्ञात हो कि भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के हिन्दुओ के लिए पाकिस्तान के एक मंत्री का खुला संदेश बन गया है चर्चा का विषय जिसको दिखाने और बताने से बच रहे हैं वो तमाम स्वघोषित पत्रकार जो पाकिस्तान को भारत के अन्दर से ही घोषित कर चुके हैं शांति का मसीहा और स्वयं को साबित कर चुके हैं इमरान गैंग का एक सक्रिय सदस्य . विदित हो कि इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान से भारत ही नहीं हिन्दुओ के लिए एक संदेश आया है .

ये संदेश धमकी के रूप में पाकिस्तान के मंत्री फ़य्याज़ उल हसन चौहान ने कहा. उनके नाम के पीछे लगा चौहान शब्द ही उनके इतिहास को बताता है लेकिन उन्होंने अपना जहर उगल ही दिया . पूरी दुनिया और खुद पाकिस्तान के हिन्दुओ को साफ़ साफ चेतावनी देते हुए पाकिस्तान के मंत्री ने कहा है कि – ‘गाय का मूत्र पीने वाले हिन्दुओं . तुम कभी भी हम मुसलमानों से लड़ नहीं सकते . देखो हमारे हाथो को , हमारे हाथों में मौला आलिया का झंडा है और हमारे पास हजरत उमर का परचम है.. तुम हिन्दुओ के पास क्या है” इतना ही नहीं आगे उन्होंने और भी जहर हिन्दू समाज के खिलाफ उगला जो जान बूझ कर दबाया जा रहा है . इस बयान के बाद इतना सवाल तो बनता ही है कि क्या सेकुलरिज्म के सभी मापदंड़ो पर हिन्दू ही खरा उतरेगा और वो सेकुलरिज्म क्या भारत के नेताओं द्वारा बनाए गये सिद्धांत पर ही टिका हुआ है या इसका कोई अटल सिद्धांत भी है ?

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