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फिलिस्तीन के बगल जो जमीन थी, अब वहां दिखेंगे इजराइल के टैंक और फ़ौजी गाडियां.. विवादित शब्द का फैसला इजराइल की अदालत में ख़त्म

मजहबी चरमपंथ के खिलाफ बेहद ही आक्रामक रुख अपनाने वाले इजराइल ने एक बार पुनः ऐसा कार्य किया है, जिसे लेकर ज्यादातर इसलामिक मुल्कों की भोहें तन सकती हैं. इजराइल पर फिलिस्तीन की सीमा पर जो विवादित जमीन थी, वहां अब इजराइल के टैंक तथा फ़ौजी गाडियां दिखाई दे रही हैं. मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, इस्राईल ने अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी और फ़िलिस्तीनी इलाक़ों के ट्रैफ़िक को बांटने के लिए एक ‘अपार्थाइड’ या रंगभेदी हाइवे का निर्माण किया है.

खबर के मुताबिक़, यह हाइवे अवैध अधिकृत बैतुल मुक़द्दस के पूर्वी रिंग रोड का ऐसा पहला भाग है, जिसका उद्घाटन कर दिया गया है, इसके निर्माण के बाद फ़िलिस्तीनी अब वेस्ट बैंक के इस भाग में प्रवेश नहीं कर सकेंगे. इस्राईल ने इस हाइवे के निर्माण से फ़िलिस्तीनियों की एक स्वतंत्र देश की मांग में रुकावट खड़ी करने का प्रयास किया है, पूर्वी बैतुल मुक़द्दस जिसकी राजधानी होगा. हाइवे 4370 के बीचो-बीच एक ऊंची दीवार का निर्माण किया गया है, जिसके ऊपर लोहे की मज़बूत जाली लगाई गई है. इस दीवार ने हाइवे को दो अलग अलग भागों में बांट दिया है.

इस हाइवे के पश्चिमी भाग का इस्तेमाल पूर्वी बैतुल मुक़द्दस आने-जाने के लिए फ़िलिस्तीनी केवल उसी स्थिति में कर सकते हैं, जब उनके पास इस्राईली सेना द्वारा जारी किया गया परमिट हो. जबकि पूर्वी भाग का इस्तेमाल अवैध बस्तियों में रहने वाले ज़ायोनी बैतुल मुक़द्दस आने-जाने के लिए कर सकते हैं. बैतुल मुक़द्दस के निकट स्थित अनाता गांव में रहने वाले फ़िलिस्तीनियों का कहना है कि इस्राईल ने यह हाइवे अनाता की ज़मीन पर बनाया है. अनाता को भी इस्राईल ने एक बड़ी दीवार का निर्माण करके बैतुल मुक़द्दस से अलग कर दिया है.

इस गांव के रहने वाले अहमद रिफ़ा का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति इस्राईल की योजना को समझ सकता है. कुछ समय पहले उन्होंने फ़िलिस्तीनियों के गांव ख़ान अल-अहमर पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए वहां के समस्त घरों को ध्वस्त कर दिया. अब वे इस हाइवे का निर्माण करके इस इलाक़े की ज़मीन हड़पना चाहते हैं. किसी ज़माने में अनाता 35000 वर्ग किलोमीटर पर फैला हुआ था, जो अब सिमटकर केवल 1000 वर्ग किलोमीटर पर रह गया है. रिफ़ा के परिवार के पास अनाता में सैकड़ों एकड़ ज़मीन हुआ करती थी, जो अब इस्राईल ने छीन ली है, ताकि वहां अवैध ज़ायोनियों बस्तियों को बसाया जा सके या सड़कों का निर्माण किया जा सके.

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