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खलिस्तान आतंक से जुड़ रहा है गुरमीत का कनेक्शन. जाने वो काला इतिहास जो कर देगा हर किसी को हैरान

आपको एक सच शायद नहीं पता होगा, उस सच से आप अनजान है, वो सच जो आपको ऑपरेशन ब्लू स्टार की याद दिलाएगी। वो सच जिसके बाद इंद्रा गाँधी को जान गवानी पड़ी थी। डेरा सच्चा पर पुलिस बल पहुंच गई है। वहां सवेदनशील हथियार बरामद हुए है। जिसमे दो एक-47 पुलिस ने पकडे है। ये हथियार स्वचालित है और ये सिर्फ सुरक्षा बलो के पास पाए जाते है या फिर आतंकियों के पास पाए जाते है। बहरहाल पुलिस जांच कर रही है और आगे देखिये की वहाँ से क्या क्या पाए जाते है।

एक कनेक्शन सामने आ रहा है जिसमे बताया जा रहा है की गुरप्रीत राम रहीम का कनेक्शन खालिस्तान के आतंकवादी से है। रामरहीम और उसका दोस्त गुरजन सिंह दोनों एक ही जगह से हैं। दोनों गंगाधर के रहने वाले है। डेरा के उत्तराधिकारी होने का एक परिक्रिया है जिसके तहत जो वहाँ का हेड होता अगर वो बीमार हो और डेरा को चलाने लायक नहीं रह जाता तब वो एक चिठ्ठी में उत्तराधिकारी का नाम लिख कर रख देते है। जो उनके मरने के बाद खोला जाता है और फिर उस चिठ्ठी में लिखे हुए नाम के शख्स को डेरा का प्रमुख बना दिया जाता है, पर इस कवायद को रामरहीम के वक़्त नहीं फॉलो किया गया।
कहा ये जा रहा की गुरजन ,राम रहीम का दोस्त था और वो राम रहीम के डेरा प्रमुख बनने में जो भी रुकावटे थी ,काँटे थी उनको दूर करते गया। गुरजन के खिलाफ इंटेलिजेन्स की रिपोर्ट है जिसमे लिखा हुआ है की वो खालिस्तान वाली मांगो के दंगो का सूत्राधार होता है और कई आतंकि गतिविधियों में शमिल रहता है। सिरसा जैसे जगहों पर हथियार इकठ्ठा होना, उसका ट्रेनिंग लोगो को देना इस बात की पुस्टि करता है की गुरजन का रामरहीम मामले में हाथ है।
आपको ऑपरेशन ब्लू स्टार याद होगा जिसमे स्वर्ण मंदिर में हथियारों का बंकर बना लिया गया था और देश के खिलाफ अलग देश की मांग के लिए आंदोलन शुरू कर दिया गया था। जिसके बाद जनरैल सिंह को मार गिराया गया था। जो की स्वर्ण मंदिर का उस वक़्त पर प्रमुख था। रिपोर्ट ये भी कहते है की उसमे पाकिस्तान की भागेदारी बढ़ चढ़ कर थी और खालिस्तान की मांग कर रहे लोगो को हथियार उसने ही मुहैया कराया था। बहरहाल सच क्या है ये तो बताएगा पर रामरहीम के गुंडे जिस तरह से आतंक फैलाये हुए है उससे तो उनको आतंकवादी कहना गलत नहीं होगा।     
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