अंतिम संदेश था- “आपका भाई शहीद होना चाहता था, अल्लाह ने उसको मौका दे दिया, पुलिस को कुछ मत बताना वरना वो आपको परेशान करेगी”

“आपका भाई शहीद होना चाहता था, अल्लाह ने उसको मौका दे दिया, पुलिस को कुछ मत बताना वरना वो आपको परेशान करेगी”. ये अंतिम शब्द थे एक आतंकी के साथियों के उसके परिवार के लिए.. उसकी मौत हुई थी हजारो किलोमीटर दूर उसके घर से लेकिन आतंक का जूनून ज्यों का त्यों कायम था , भले ही वो उतर कर आतंकी के बजाय उसके साथियों और उसके घर वालों पर चढ़ गया रहा हो .. केरल से निकल कर ओ चला गया था अफगानिस्तान .. खून की होली खेलने की शौक में .

वो अनपढ़ नहीं था बल्कि इंजिनियर बनने की पढ़ाई पढ़ रहा था.. लेकिन उसके मन में खून की होली खेलने की शौक थी. भारत की सेना और पुलिस की सतर्कता के चतले उसको मौका तक नहीं लगा अपने मंसूबे पूरे करने में . वो ऐसी जगह की कल्पना कर रहा था जहाँ उसको जी भर के खून बहाने की छूट मिल जाए और उसको इसके लिए सही जगह लगी थी अफगानिस्तान . उसने अपनी पढ़ाई ही नहीं बल्कि परिवार भी छोड़ दिया था और निकल पड़ा था रक्त की होली खेलने..

आतंकी संगठन को ज्वॉइन करने वाले अधिकतर लोग केरल के कन्नूर जिले से हैं। वहाँ क़रीब ४० लोग इस आतंकी संगठन में जा चुके हैं। इन ४० लोगों में ८ महिलाएँ भी शामिल हैं।कन्नूर के अलावा कासरगोड, कोझिकोड, मलप्पुरम, पलक्कड, एर्नाकुलम और थ्रिसुर के लोग भी इस आतंकी संगठन में शामिल हो चुके हैं। इनमें से अधिकतर लोग सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठन IS से प्रभावित हुए थे। यहाँ पर NIA की विशेष नजर है लेकिन वामपंथ शासन में यहाँ ऐसी हरकतों को एक प्रकार से बढ़ावा ही मिलता दिखे ..

आतंकी की मौत के बाद आये अंतिम संदेश में बाकायदा उसके परिवार को हिदायत और सलाह भी दी गई थी . मुहम्मद मुहसिन की मौत की खबर उसके परिजनों को व्हाटसएप के एक संदेश के जरिए मिली। वो संदेश मलयालम भाषा में लिखा था, “आपका भाई शहीद होना चाहता था। अल्लाह ने उसकी आकांक्षा के मुताबिक उसकी ख्वाहिश पूरी कर दी। १० दिन पहले हुए अमेरिकी सेना के ड्रोन हमले में वो शहीद हो गया।” इसी संदेश में आगे लिखा था कि कृपया यह बात पुलिस को ना बताएँ, वर्ना वो आपके घर आकर आपको परेशान करना शुरू कर देंगे। आपका भाई ऐसा कुछ भी नहीं चाहता था। पुलिस के मुताबिक़, इस मैसेज में एक तस्वीर भी है, जिसमें मुहम्मद मुहसिन की डेडबॉडी दिखाई गई है।

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