तमाम मुस्लिम संगठन मस्जिद के हमलावर ब्रेंटन टैरंट के लिए मांग रहे हैं फांसी.. जानिये क्या न्यूजीलैंड के कानून से ये सम्भव है ?

न्यूजीलैंड की मस्जिद में घुस कर गोलीबारी करने वाले आस्ट्रेलियाई युवक ब्रेंटन टैरंट के  खिलाफ दुनिया भर में सेकुलर और मुस्लिम  नेताओं ने विरोध प्रस्ताव पारित किया है . उनका कहना है कि ये हमला एक बेहद निंदनीय घटना है जिसकी जितनी भी निंदा की जाय वो कम है . इतना ही नहीं दुनिया के तमाम मुस्लिम देशो की सरकारों ने तो हमलावर को अधिकतम सजा देने की मांग की है . तमाम विरोध प्रदर्शनों के साथ ही कुछ लोगों ने हमलावर को मृत्युदंड भी देने की मांग की है .

लेकिन जब बात नियमो और किसी देश के सिद्धांतो की आ जाय तो सब कुछ उस के ही हिसाब से होता है क्योकि देश या जनता की जनभावनाएं अलग होती हैं और देश के कानून अलग .. ठीक उसी प्रकार से जैसे दिल्ली की निर्भया के बलात्कारियो और हत्यारों में से पांचवे दरिन्दे के खिलाफ पूरा देश एकमत से मृत्युदंड चाह रहा था पर आख़िरकार उसको भारत के कानून के हिसाब से नाबालिग होने का फायदा पंहुचा और वो बच निकला था .

अब बात न्यूजीलैंड की कर ली जाय . न्यूजीलैंड देश के वर्तमान कानून के प्रावधानों के हिसाब से मस्जिद में घुस कर लगभग 50 लोगो को मार देने वाले आस्ट्रेलियाई युवक ब्रेंटन को फांसी या मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता है . यहाँ पर ध्यान देने योग्य है कि न्यूजीलैंड में सन १९५७ के बाद से आज तक किसी को भी मृत्युदंड नहीं दिया गया है . सन १९८९ के बाद से न्यूजीलैंड में आधिकारिक रूप से मृत्युदंड का प्रावधान खत्म कर दिया गया है .

इसको दुबारा चालू करवाने के लिए अभी कुछ समय पहले ही जनता की राय न्यूजीलैंड की सरकार ने ली थी लेकिन उस समय बड़ी संख्या में जनता ने बहुमत के साथ इसको दुबारा चालू न करने और बंद ही रखने का निर्णय दिया था. इतना ही नहीं न्यूजीलैंड में राष्ट्रद्रोह तक के मामले में भी मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है .. इस हिसाब से इतना तो तय है कि ब्रेंटन को मृत्युदंड नहीं दिया जा सकेगा भले ही उसको एक लम्बा समय जेल के अन्दर बिताना पड़े .. ..

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