रूस की वो लड़की जो हिंदू और हिंदुस्तान को दे बैठी है दिल. इन्होने फिर कुछ बड़ा करके शिक्षा दी नकली बनावटी लोगों को


रूस की इस लड़की ने अपना दिल न सिर्फ हिंदुस्तान को दिया है बल्कि इन्होने हिन्दू तथा हिंदुत्व को भी पूरी तरह से अपना लिया है. ये जवाब है उन लोगों को जिन्हें हिंदुस्तान में असहिष्णुता नजर आती है तथा जिनको हिन्दू संस्कृति रास नहीं आती. दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क रूस की राजधानी मास्को की रहने वाली सोफिको सोनिया एक सामान्य टूरिस्ट की तरह 2010 में भारत घूमने आई थी. इस दौरान उन्हें भारतीय हिन्दू संस्कृति, सभ्यता, भारतीय गीत-संगीत तथा नृत्य इस कदर भाया कि वह हमेशा के लिए यहीं की हो गईं.

रूस की सोफिको सोनिया ने हिंदुस्तान में पने नृत्य को कुछ इस तरह संवारा कि आज भारतीय नृत्य शैली ही उनकी पहचान बन गई है. वे मास्को से लेकर दिल्ली तक इंडियन डांस के सेमी क्लासिकल स्टाइल के अनेक बड़े-बड़े कार्यक्रम समय-समय पर प्रस्तुत करती रहती हैं. सोफिको बताती हैं कि भारत आने के बाद उन्होंने 2011 में इंडियन डांस की ट्रेनिंग लेनी शुरु कर दी. दिल्ली के कोरियोग्राफर नितिन राठी उन्हें विभिन्न भारतीय नृत्य कलाओं से परिचित करा रहे थे. लगभग दो साल बाद उन्होंने महसूस किया कि नितिन उन्हें ज्यादा अच्छी तरह से समझते हैं. वे स्वयं उनकी और उनकी कला की कद्र करते हैं.

सोफिको बताती हैं कि इसके बाद दोनों करीब आने लगे और मामला शादी तक पहुंच गया. दोनों ने वर्ष 2014 में मास्को में शादी कर ली. उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दोनों ही पेशे से इंजीनियर हैं. एक संभ्रांत परिवार में उनका पालन-पोषण हुआ. लेकिन जल्दी ही उन्होंने यह महसूस किया कि संगीत ही उनकी दुनिया है. पहले तो उन्होंने बैले जैसी रूसी नृत्य कलाओं को सीखा और बाद हिंदुस्तानी संगीत-नृत्य की शिक्षा ली. वर्ष 2006 में ही उन्होंने इरीना से मोहिनीयाट्टम (केरल की एक नृत्य शैली) सीखी. बाद में भारत आकर गुरु सपन आचार्य से अनेक विधाओं में नृत्य सीखा.

मास्को की एक यूनिवर्सिटी से प्यानो बजाने में स्नातक कर चुकीं सोफिको सोनिया बताती हैं कि भारतीय संगीत हो, नृत्य कला हो या भारतीय संस्कृति, यह कुछ पलों की खुशी प्राप्त करने का साधन नहीं है. बल्कि जब आप भारतीय कलाओं में डूबते हैं, तब आपको एहसास होता है कि यह ईश्वर को पाने का एक साधन भी है. यहां के गुरुओं ने डांस को जिस तरह आध्यात्मिकता से जोड़ा है, वह अद्भुत है. उनका मानना है कि पूरी दुनिया को इसे अपनाना चाहिए क्योंकि यह शांति पाने का एक बेहतरीन रास्ता है. स्वयं भारत को भी दुनिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए भारतीय गीत-संगीत और नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना चाहिए.

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