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पाकिस्तान की हिना रब्बानी ने भी दी है एक चेतावनी.. लेकिन भारत को नहीं

भारत सरकार द्वारा कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद बौखलाया पाकिस्तान दुनिया भर में  हाय तौबा मचाकर अपनी फजीहत करवा चुका है लेकिन फिर भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. पाकिस्तान स्वयं इतनी आन्तरिक समस्याओं से जूझ रहा है कि वहां की जनता त्राहिमाम कर रही है, लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरान इससे बेपरवाह हैं तथा भारत के खिलाफ युद्धोन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, भारत को लगातार युद्ध की गीदड़ भभकियां दे रहे हैं.

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कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहे पाकिस्तानी नेताओं को अब पाकिस्तान की ही लोकप्रिय नेता तथा वहां की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खान ने चेतावनी दी है. हिना रब्बानी खान ने कहा है कि पाकिस्तान के हुक्मरानों को चाहिए कि वह भारत के खिलाफ उलझने की कोशिश न करें. उन्होंने कहा है कि ”पाकिस्तान का भला इसी में है कि वह अमरीका व चीन के चक्कर में न पड़ कर अपने पड़ोसियों से संबंध सुधारे। खासकर भारत से संबंध सुधारे बिना उसके पास कोई चारा नहीं है।”

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पाकिस्तानी दैनिक ‘डॉन’ में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार एक सभा में इमरान खान के राजनीतिक ज्ञान की धज्जियां उड़ाते हुए हिना ने कहा, ”इमरान खान को तो भूगोल तक की जानकारी नहीं है और वह जर्मनी तथा जापान को पाकिस्तान का पड़ोसी बताते हैं। पहले वह ट्रेङ्क्षनग लेकर आएं और फिर राजनीति करें. पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता अमरीका की बजाय भारत, अफगानिस्तान और ईरान के साथ होना चाहिए.” हिना रब्बानी ने यह भी कहा, ”पाकिस्तान को अवश्य ही अफगान युद्ध से बाहर निकल जाना चाहिए क्योंकि 17 वर्षों से चले आ रहे इस युद्ध में पाकिस्तान को ही सर्वाधिक नुक्सान उठाना पड़ा है.”

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हिना रब्बानी द्वारा ऐसा बयान देने का यह पहला मौका नहीं है. पहले भी वह कई बार पाकिस्तान के शासकों को आइना दिखाते हुए कह चुकी हैं कि ”भारत से लड़ कर पाकिस्तान कश्मीर को नहीं जीत सकता.” गले तक कर्ज में डूबे, कंगाली और भुखमरी की कगार पर पहुंचे पाकिस्तान के शासकों को अपने देश में उठने वाली ये आवाजें सुननी चाहिएं और भारत विरोधी रवैया जारी रख कर अपने ही हितों पर कुठाराघात करने की बजाय शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की विचारधारा अपना कर अपने तबाह हो रहे देश में सुख-शांति और खुशहाली लाने का प्रयास करना चाहिए.

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