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सियारों द्वारा सिंहो को चुनौती की परम्परा बढ़ी आगे.. पाकिस्तान की भारत को चुनौती के बाद अब तालिबान दे रहा ऐसे देश को चुनौती जो मसल सकता है उसे पल भर में

पहले खुल कर खून खराबे की चुनौती देना और जब चुनौती स्वीकार हो जाए तो कभी संयुक्त राष्ट्र के पास तो कभी मानवाधिकार के पास जा कर शिकायत करना .. ये एक ऐसी परम्परा बन गई है कुछ आतंकियों और उनके पैरोकारों की जिसका स्थाई समाधान जल्द ही खोजना जरूरी होगा वरना जिहादियो का युद्धोन्माद ऐसे ही बढ़ता जाएगा.. कुछ समय पहले म्यन्मार में रोहिंग्या आतंकियों ने ऐसे ही बम ब्लास्ट कर के बौद्धों को चुनौती दी थी जिसको स्वीकार करने के बाद बौध्दो को संयुक्त राष्ट्र से बुरा भला कहलवाने लगे वही चुनौती देने वाले..

फिर श्रीलंका में पहले ब्लास्ट कर के वहां के सिंहलियों को उकसाया या और बाद में उसी श्रीलंका के निवासियों को कभी क्रूर तो कभी कुछ और कह कर विदेशी देशो से हस्तक्षेप की मांग की जाने लगी.. ऐसे ही यूरोपीय देशो में भी हुआ जहाँ जर्मनी , फ्रांस और ब्रिटेन आदि में ताबड़तोड़ आतंकी हमले किये और जब वहां की सरकार और जनता ने अपने रुख को बदला तब वहां के मानवाधिकार समूहों से गुहार लगाईं जाने लगी अपने मानवाधिकार की रक्षा आदि की बातें करते हुए ..

ताजा परिदृश्य में पाकिस्तान द्वारा भारत को दी जा रही चुनौती सब देख ही रहे हैं जहाँ पाई पाई को मोहताज़ पाकिस्तान भारत से आये दिन जंग लड़ने की बेताबी दिखा रहे है जबकि वो जानता है कि भारत से युद्ध उनके अस्तित्व को खत्म कर देगा.. लेकिन उसी का देख कर अब एक नया समूह भी हो गया है युद्ध का उन्मादी और चुनौती देने लगा है एक ऐसे देश को जिले के लिए मात्र विचार कर लेना ही उसकी आमूलचूल बर्बादी की सबसे बड़ी वजह बन सकता है .. लेकिन भी भी चुनौती मजबूत देश की तरफ से नहीं मिल रही ..

इस बार चुनौती देने वाले समूह का नाम है तालिबान जो अफगानिस्तान में सक्रिय एक दुर्दांत इस्लामिक आतंकी दल है.. ये सीधी चुनौती महाशक्ति अमेरिका को दे रहा है क्योकि अमेरिका ने उसके आतंकियों से बातचीत करने से साफ मना कर दिया है.. यद्दपि अमेरिका को दी जा रही तालिबान की धमकी को दुनिया मात्र एक मजाक के रूप में देख रही है क्योकि दुनिया भर को पता है अमेरिका ताकत और उसके खिलाफ तालिबान की हैसियत .. लेकिन फिर भी तालिबान युद्ध का उन्मादी होता जा रहा है .

अपनी औकात से कहीं आगे जाते हुए हास्यास्पद रूप से इस्लामिक आतंकी दल तालिबान का कहना है कि अमेरिका के लिए ये भारी पड़ने वाला है। इससे अमेरिका की छवि पर असर होगा, लोगों की जान जाएगी और शांति भंग होगी। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप और तालिबान के बड़े नेताओं के बीच ये बैठक कैंप डेविड में होने थी, जहां अक्सर अमेरिकी राष्ट्रपति बड़ी और अहम बैठकें करते हैं। ये सभी शेखी तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने बघारी है ..

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