कभी भारत से होता था सिर्फ इजरायल का विरोध.. लेकिन अब सरकार बदली है, और सोच भी. अब विरोध उस इस्लामिक मुल्क का हुआ जो इस बीच दिखा रहा था सबसे ज्यादा दादागीरी

इजरायल के हमलो के खिलाफ कभी भारत के अन्दर प्रदर्शन हुए हैं और नारेबाजी हुई है फिलिस्तीन के समर्थन में. उस समय वोट की न जाने कौन सी लहलहाती फसल को देख कर कुछ नेता उसको काटने चले आते थे और इजरायल के विरोध को अपनी तरफ से हवा देते हुए उस मामले को दुनिया भर में उठाते फिरते थे , जबकि भारत के सच्चे सहयोगियों में अगर किसी देश का नाम सबसे प्रमुखता से गिना जाता है तो वो देश है इजरायल जिसने कई संकट काल में भारत का खुला साथ और समर्थन किया.

लेकिन सरकार के साथ सोच और समय दोनों बदल गया है और अब इजरायल का नहीं बल्कि उसका विरोध शुरू हुआ है दुनिया भर में जिसका असल में जायज़ था .. इस बार मोदी सरकार ने दुनिया भर में मुसलमानों के बीच दादगीरी दिखने वाले तुर्की के खिलाफ बयान दिया है और उसके द्वारा सीरिया पर किये गये हमले का विरोध किया गया है . म्यांमार के साथ श्रीलंका के बौद्धों के खिलाफ बोल कर तुर्की ने मुसलमान देशो में एक नई धौंस जमा ली थी ..

तुर्की ने इसके साथ ही चीन से उईगर मुसलमानों के खिलाफ सख्ती से पेश न आने को कहा था और अब उसी तुर्की ने सीरिया पर हमला कर के खुद के युद्धोन्मादी होने का संदेश दिया है. लेकिन युद्ध के उन्मादी हो चुके तुर्की को भारत ने वैसे ही जवाब दिया जैसे कभी इसी भारत से इजरायल के विरोध में जाया करता था.. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हम पूर्वोत्तर सीरिया में तुर्की के एकतरफा सैन्य हमले पर गहरी चिंता जाहिर करते हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय ने आगे बयान में कहा है कि तुर्की का कदम क्षेत्र में स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर सकता है। इस कदम से मानवीय संकट पैदा होने की संभावना है।’अगर तुर्की का भारत के खिलाफ इतिहास उठा कर देखा जाय तो बेहद निकृष्ट कहा जाएगा .. तुर्की ही वो देश है जिसने बार बार कई मंचो से केवल मुस्लिम एंगल रखते हुए भारत का विरोध किया था और पाकिस्तान का समर्थन दिया था . कश्मीर के मामले में भी तुर्की ने बेहद घटिया रुख अपनाया था .

भारत ने तुर्की के इस ऐक्शन पर विरोध ऐसे समय में जताया है जब हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का जिक्र करते हुए पाकिस्तान का समर्थन किया था। तुर्की ने कई बार कश्मीर में कथित तौर पर मानवाधिकार के उल्लंघन की बात की है। तुर्की के राष्ट्रपति ने कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से भी कर डाली। इतना ही नहीं, तुर्की पाकिस्तान के लिए युद्धपोत भी बना रहा है। भारत के इस नए बदले रूप से इजरायल और अमेरिका जैसे देश खुश नजर आ रहे हैं..


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