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सामने आया कांगो में भारतीय सेना के जांबाज कर्नल गौरव सोलंकी के बलिदान का कारण.. जानकर गर्व करेंगे आप

हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो Democratic Republic of Congo में तैनात भारतीय सेना के कर्नल गौरव सोलंकी झील में डूबने से बलिदान हो गये थे. लेफ्टिनेंट कर्नल गौरव सोलंकी को मध्य अफ्रीकी देश में संयुक्त राष्ट्र के अभियान में एक सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया गया था. संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में तैनात गौरव सोलंकी पिछले शनिवार से लापता थे. अब भारतीय सेना के अमर बलिदानी कर्नल गौरव सोलंकी के बलिदान के बारे में जो जानकारी सामने आई है, उसे जान हर भारतीय का सर गर्व से उंचा हो गया है तो वहीं भारतीय जांबाज को दुनिया ने भी सैल्यूट किया है.

खबर के मुताबिक़, लेफ्टिनेंट कर्नल सोलंकी के साथ एक ग्रुप भी था जो बीते रविवार कांगो और रवांडा की सीमा के बीच स्थित चेगेरा द्वीप के पास कीवु झील कायकिंग ट्रिप पर गया था. सेना के मुताबिक वह कायकिंग की कीवु झील में गए थे जिसके बाद से वह लापता हो गए थे. जानकारी के  के मुताबिक गौरव के सहयोगी अधिकारी झील में डूब रहे थे जिन्हें बचाने के लिए गौरव भी अपनी लाइफ जैकेट उतारकर झील में कूद गए. कर्नल गौरव ने अपने साथियों को तो बचा लिया लेकिन वह खुद डूब गये तथा अपना बलिदान दे दिया.

अपने साथियों को बचाते हुए कर्नल गौरव के झील में डूबने के बाद शीर्ष अधिकारीयों को जानकारी दी गई. इसके बाद कर्नल गौरव की तलाश के लिए स्पीड बोट और हैलीकॉप्टर से खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. सोलंकी का शव गुरुवार को चेगेरा द्वीप से कुछ दूरी पर बरामद किया गया. सूत्रों के अनुसार, सोलंकी ने कांगो में अपना काम पूरा कर लिया था और वह अगले कुछ दिनों में भारत में अपने रेजिमेंट में शामिल होने वाले थे. बता दें कि डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को मोनुस्को के नाम से जाना जाता है. विदेशी जमीन पर भारतीय सेना की सबसे बड़ी तैनाती कांगो में है. उत्तर किवु प्रांत की राजधानी गोमा में भारतीय ब्रिगेड का मुख्यालय है. शांति मिशन के तहत मोनुस्को में फिलहाल 2,613 भारतीय सैनिक तैनात हैं.

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