भारत में रोहिंग्याओं को बसाने के लिए लग रही याचिका लेकिन इस्लामिक मुल्क बंगलादेश सरकार ने 20 साल की रोहिग्या लडकी के साथ किया ये सलूक


2 अलग अलग देशो के हालत देखा जाय तो एक देश सेक्युलर है जहाँ पर मुस्लिम चरमपंथी घोषित हो चुके रोहिंग्या को बसाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बाकायदा याचिका डाली जाती है . जब वो बस जाते हैं तो उनके बेहतर रहने खाने और स्वास्थ्य के लिए भी अदालत में अर्जी पेश की जाती है और बाकायदा उसको मनवा भी लिया जाता है.. इसी को वो रोहिंग्या प्रोत्साहन मान कर फर्जी आधार कार्ड , फर्जी वोटर कार्ड और फर्जी पासपोर्ट तक बनवा लेते हैं .. लेकिन वहीँ एक अन्य इस्लामिक मुल्क में हालात बदले से हैं .

रोहिंग्या को अपने देश में रखने आदि के नाम पर अगर किसी देश ने सबसे ज्यादा अन्तराष्ट्रीय वाहवाही के साथ मदद ली है तो वो हैं बंगलादेश.. इस्लामिक मुल्क बंगलादेश में ईसाइयों के सबसे बड़े गुरु पोप तक जा चुके हैं और उसकी तारीफ कर चुके हैं.. लेकिन उसी बंगलादेश में हालात भारत से उलट हैं . वहां इनके लिए कोई भी याचिका लगाने को तैयार नहीं है और बल्कि वहां इनकी लडकियों की तस्करी आदि की कई घटनाये सामने आई हैं .

अब एक और मामले ने रोहिंग्या को बंगलादेशी मुसलमानो और वहां की सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया है . बंगलादेश ने 20 साल की एक रोहिंग्या लड़की को कालेज से निकल दिया है और कालेज प्रशासन की तरफ से उस पर कार्यवाही भी की गई है . रोहिंग्या लड़की खुद के महिला होने के साथ पढ़ाई के अधिकार की तमाम दुहाई देती रही पर बंगलादेश सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा और उसको निकाल दिया गया.. पूरे बंगलादेश में एक भी आवाज उस लडकी के पक्ष में नहीं उठी है अब तक .

इस मुस्लिम लडकी का नाम है रहीमा अख्तर .. रहीमा अकतर ने बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार में एक निजी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए अपनी रोहिंग्या पहचान को छुपाया, लेकिन इस महीने की शुरुआत में उनके विश्वविद्यालय द्वारा निलंबित किए जाने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के उनके सपने धराशायी हो गए। रहीमा अकतर का जन्म और पालन-पोषण बांग्लादेश में हुआ था। उसके माता-पिता 1992 में म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों के सामूहिक पलायन के दौरान भाग गए थे।

 

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