ईसाई द्वारा न्यूजीलैंड में मुस्लिमों के खिलाफ जो हुआ वो गलत था.. पर पाकिस्तान में मुस्लिमों ने जो ईसाई के साथ किया वो क्या है?

ईसाई अतिवादी युवक ब्रेंटन टैरेंट द्वारा न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की 2 मस्जिदों में जिस तरह हमला किया गया तथा 50 लोगों की जान ले ली गई, वो निश्चित रूप से गलत था.. लेकिन इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान में मुस्लिम उन्मादियों द्वारा एक  ईसाई महिला के साथ जो ज्यादती की गई, दुनिया उस पर मौन क्यों साधे हुए है? आपको बता दें कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 35 साल की एक विवाहित ईसाई महिला साइमा इकबाल को उसके घर से अगवा कर लिया गया तथा जबरन उसका धर्मान्तरण करके उससे जबरदस्ती निकाह कर लिया.

इससे भी आश्चर्य की बात ये है कि इमरान खान की पुलिस साइमा के पति नाविद की मदद करने के बजाय उन्हें चुप रहने की ताकीद दे रही है और उधर उनकी पत्नी को जबरिया अपनी बीबी बनाने वाला स्थानीय गुंडा खालिद सट्टी उन्हें धमकी दे रहा है कि अगर उन्होंने पुलिस में दी गई शिकायत वापस नहीं ली तो उनके साथ उनके तीनों बच्चों की भी खैर नहीं. पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समाज को दहशत में डालने और अपमानित करने वाला यह शर्मनाक मामला बीती 25 फरवरी का है. घटना तब सामने आई जब साइमा के पति नाविद इकबाल ने अपनी आपबीती बयान करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला.

साइमा के पति के इस वीडियो के मुताबिक उनकी पत्नी को इस्लामाबाद टाउन के उनके घर से तब अगवा किया गया जब वह एक कॉल सेंटर में नाइट शिफ्ट की ड्यूटी करने गए थे. 26 फरवरी को सुबह घर आने पर उन्हें जब अपनी पत्नी के अगवा होने की खबर मिली तो वह थाने रपट लिखाने गए. पुलिस नाविद की मदद के करने के बजाय उन्हें चुप रहने की हिदायत दी. पत्नी को अगवा करने वाले गुंडे की धमकियों के भय से नाविद अपने तीनों बच्चों के साथ घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर रह रहे हैं. पुलिस ने साइमा को खालिद सट्टी के घर से निकाल कर उसके घर भेजने के बजाय  महिला आश्रय गृह में भेज दिया है. ईसाई दंपत्ति साइमा और नाविद इकबाल की दास्तान सोशल मीडया पर तो है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने इस शमर्नाक मामले का मुश्किल से ही संज्ञान लिया है.

साइमा के पति नाविद के मुताबिक पुलिस ने उनकी शिकायत पर चार-पांच दिन तक कुछ नहीं किया. जब एक मार्च को उन्होंने आत्महत्या करने की धमकी तो वह हरकत में आई. 5 मार्च को उसने नाविद से कहा कि साइमा ने तो मजहब बदल कर निकाह कर लिया है. पुलिस ने उन्हें साइमा के निकाह के कथित दस्तावेज भी दिखाए. नाविद का कहना है कि ये दस्तावेज फर्जी हैं और मजहब बदलने वाले कागज पर किसी मौलवी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं. नाविद ने इन दस्तावेजों को अदालत में चुनौती दी है. 19 मार्च को अदालत इस मामले को सुनेगी, लेकिन उन्हें न्याय मिलने की मिलने की उम्मीद कम ही है, क्योंकि पाकिस्तान की अदालतें आम तौर पर इस तरह के फर्जी दस्तावेजों को सही करार देती हैं. साइमा और इकबाल की शादी 15 साल पहले हुई थी. उनके चार, आठ और 13 साल के तीन बच्चे हैं.

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW