जानिए क्या था लिट्टे (LTTE), जिसने रक्त से रंग दिया था श्रीलंका को

दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गये एक व्यक्ति से शुरू और बाद में एक बड़ा संगठन बन गए समूहों में से एक था जिसने श्रीलंका सरकार के विरुद्ध विद्रोह का डंका बजा कर दे दी थी कभी बराबरी की चुनौती । इसे  लिट्टे लिबरेशन टाइगर्स तमिल ईलम या तमिल टाइगर्स के रूप में जाना जाता है। यह एक अलगाववादी संगठन है जो औपचारिक रूप से उत्तरी श्रीलंका में स्थित है। यह संगठन 1976 में एक हिंसक पृथकतावादी अभियान के रूप में उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में शुरू हुआ। जिसका मक्सद श्रीलंका में एक स्वतंत्र तमिल राज्य की स्थापना करना था। 
लिट्टे का यह अभियान श्रीलंका नागरिक युद्व जो एशिया का सबसे लम्बा चलने वाला सशस्त्र संघर्ष था, ये सशस्त्र संघर्ष तब तक चलता रहा जब तक मई 2009 सैन्य, श्रीलंका सेना द्वारा हराया नहीं गया। लिट्टे जब अपने खुनी संघर्ष की चरम सीमा पर था तब उन्होने एक ऐसा सेना दल विकसित किया जिसमें बच्चे सिपाहियों होते थे।  जिससे वे असैनिक हत्याएं कर सकें। ये हत्या अलग अलग तरीके से होती थी। ये आत्मघाती बम विस्फोट और कई अन्य तरह से बड़ी बड़ी हस्तीयाओं पर हमला करने में विख्यात थे। 
बता दें कि लिट्टे ने ही भारतीय राजनेता राजीव गांधी को मार दिया था इसके साथ उच्च पद अधिकारी, श्रीलंका के हजारों लोगों के साथ कई अनेक लोगों को मार डाला। इन्होनें कई अलग अलग तरह के हमलों की शुरूआत भी की, जिसमें आत्घाती बेल्ट और आत्मघाती बम विस्फोट हमले प्रमुख थे। लिट्टे का नेतृत्व वेलुजिल्लै प्रभाकरण ने प्रांरभ से लेकर अपनी मृत्यृ तक किया। वर्तमान में वे बिना किसी नेतृत्व के काम कर रहे है।
इस संघर्ष के दौरान, तमिल टाइगर्स बार-बार इस प्रक्रिया में भयंकर विरोध के बाद उत्तर-पूर्वी श्रीलंका और श्रीलंकाई सेना के साथ नियंत्रण क्षेत्र पर अधिकारों को बदलते थे। वे शांति वार्ता द्बारा इस संघर्ष को समाप्त करना चाहते थे, इसलिए चार बार प्रयत्न किया पर असफल रहे। 2002 में शांति वार्ता के अंतिम दौर के शुरू में, उनके नियंत्रण में 2 15,000 वर्गमूल क्षेत्र था। 2006 में शांति प्रक्रिया के असफल होने के बाद श्रीलंकाई सैनिक ने टाईगर्स के खिलाफ एक बड़ा आक्रामक कार्य शुरू किया, लिट्टे को पराजित कर पूरे देश को अपने नियंत्रण में ले आए। टाईगर्स पर अपने विजय को श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्सा द्वारा 16 मई 2009 को घोषित किया गया था और लिट्टे ने मई 17, 2009 को हार स्वीकार किया। विद्रोही नेता प्रभाकरण बाद में सरकारी सेना द्वारा 19 मई को मारे गए थे।
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