इस्लाम के बारे में ऐसा क्या लिख दिया ब्रिटेन के पीएम पद के सबसे तगड़े दावेदार जॉनसन ने जो अब फंस गये कट्टरपंथ के भंवर में

बोरिस जॉनसन ये वो नाम है जो इस समय इस्लामिक लोगों के निशाने पर हैं. ऐसा क्यों हैं, ये जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर बोरिस जॉनसन कौन हैं? आपको बता दें कि बोरिस जॉनसन ब्रिटेन के एक कद्दावर राजनेता हैं जिन्हें ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है. ब्रिटेन के पीएम पद के दावेदारों में बोरिस जॉनसन का नाम सबसे आगे माना जा रहा है लेकिन इससे पहले ही वह इस्लाम को लेकर लिखे गये अपने एक लेख के लिए कट्टरपंथ के भंवरजाल में फंस गये हैं.

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खबर के मुताबिक़, ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ ने बोरिस जॉनसन का एक पुराना लेख निकाला है जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि इस्लाम की वजह से मुस्लिम पश्चिमी देशों से सदियों पीछे रह गए. अब जब वह ब्रिटेन के पीएम बनने के सबसे तगड़े दावेदार हैं, तब उनका ये लेख फिर से सामने आ गया है जिसमें उन्हें इस्लाम के खिलाफ नफरत पैदा करने का आरोपी करार दिया जा रहा है. ब्रिटेन के पीएम पद के दावेदार बनने के बाद से अब उनका इस्लाम विरोधी नजरिया फिर से सुर्खियों में है.

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गार्जियन के मुताबिक, जॉनसन ने एक लेख में दावा किया था कि दुनिया के कई हिस्सों में इस्लाम ने विकास का रास्ता अवरुद्ध कर दिया. उन्होंने लेख में लिखा था कि मुस्लिम दुनिया जितना पिछड़ती गई, उतनी ही ज्यादा कड़वाहट और संशय की भावना जन्म लेती गई. दुनिया भर में आप वैश्विक संघर्ष के जितने बिंदुओं के बारे में आप सोच सकते हैं- बोस्निया से फिलिस्तीन, इराक से लेकर कश्मीर तक, उसमें कुछ मात्रा में मुस्लिम असंतोष की भावना शामिल रही है. उनके इस बयान पर इस्लामिक वर्ग नाराज हो गया है कि जॉनसन को इस्लाम धर्म की समझ ही नहीं है.

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मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (एमसीबी) ने कहा कि अब जब बोरिस जॉनसन ब्रिटेन के अगले पीएम बन सकते हैं तो लोग जानना चाहते हैं कि क्या जॉनसन अभी भी यही मानते हैं कि इस्लाम तरक्की और आजादी के मार्ग में रुकावट है. काउंसिल ने सवाल किया कि क्या जॉनसन अब भी ऐसा ही नजरिया रखते हैं? इसके अलावा 2018 में एक अखबार में जॉनसन ने एक कॉलम में बुर्का पहनने वाली महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसके बाद जॉनसन पर इस्लामोफोबिया बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं कि वह मुस्लिमों से नफरत करते हैं.

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द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉनसन ने 2006 में रोमन साम्राज्य के बारे में लिखी किताब “The Dream of Rome” में इस्लाम के उदय के बारे में लिखा था. उन्होंने लिखा, इस्लाम के बारे में कुछ ऐसा जरूर होना चाहिए, जिससे यह समझने में मदद मिल सके कि मुस्लिम दुनिया में बुर्जुवा, नवउदारवाद और लोकतंत्र का प्रसार क्यों नहीं हो सका. जॉनसन का नजरिया था कि इस्लामिक दुनिया की तकनीकी और सांस्कृतिक प्रगति रोकने में धर्म की अहम भूमिका थी. जॉनसन ने लिखा था, रोमन/बैजेंटाइन साम्राज्य के शासन में कॉन्सटैंटनोपल शहर में ज्ञान की धारा हजारों सालों तक बहती रही जबकि ऑटोमन साम्राज्य में 19वीं सदी की शुरुआत तक इस्तांबुल में पहली प्रिटिंग प्रेस भी नहीं आ सकी. कोई तो ऐसी चीज थी जिसने उसे सदियों पीछे कर दिया.

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ब्रिटिश सांसद बोरिस जॉनसन ने यह भी दावा किया था कि इस्लामिक कला में भी 16वीं सदी के माइकलएजेंलो की कलाकृति की तरह एक भी उत्कृष्ट कृति जन्म नहीं ले सकी. जॉनसन ने यूरोपीय संघ से यूके के अलग होने के लिए सफल कैंपेन चलाया था और वह कंजरवेटिव पार्टी में प्रधानमंत्री पद के लिए पहली पसंद हैं. कहा जा रहा है कि वह वर्तमान प्रधानमंत्री टेरेसा मे की जगह अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. कई मौकों पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ बयान देने की वजह से उनकी आलोचना होती रही है. 2018 में अखबार द टेलीग्राफ में लिखे एक कॉलम में उन्होंने लिखा था कि जो महिलाएं बुर्का पहनती हैं, वे किसी ‘लेटरबॉक्स’ या ‘बैंक लुटेरों’ की तरह लगती हैं.

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द गार्जियन के मुताबिक, 2007 में “And Then Came the Muslims” शीर्षक वाले एक लेख में जॉनसन ने विंस्टन चर्चिल की पंक्तियों को कोट किया था- दुनिया में इस्लाम से ज्यादा पीछे धकेलने वाली कोई ताकत नहीं है. बतौर जॉनसन, यह वक्त है कि हम गहराई में उतरें और चर्चिल से लेकर पोप तक के आरोपों की जांच करें. इस्लामिक दुनिया की असली समस्या इस्लाम ही है. हमें ईमानदार होना पड़ेगा और यह स्वीकार करना होगा कि चर्चिल के धर्म के सामाजिक और आर्थिक परिणाम के विश्लेषण में काफी सच्चाई है. राजनेता ने आगे कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि उन्हें इस्लामोफोबिया का आरोपी करार नहीं दिया जाएगा.

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