एक ऐसी जगह जहाँ गांधी घोषित हुए नस्लवादी.. यहाँ तक कि अदालत ने भी कहा “हाँ” और रोक दी गई गांधी की प्रतिमा

हिंदुस्तान में राष्ट्रपिता कहे जाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी को लेकर ऐसी खबर शायद ही सुनी होगी. आपको बता दें कि अफीकी देश मलावी में गांधी जी की प्रतिमा लगाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों ने विद्रोह कर दिया है तथा कहा है कि उन्हें गांधी स्वीकार नहीं हैं क्योंकि गांधी नस्लवादी थे. आश्चर्य की बात ये है कि मलावी की अदालत ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया है तथा गांधी की प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी है.

बता दें कि मलावी की आर्थिक राजधानी ब्लांटायर में गांधी की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा था. ये प्रतिमा भारत के साथ एक करोड़ डॉलर के निर्माण समझौते के तहत बनाई जा रही थी. गांधी मस्ट फॉल’ नामक संगठन के गांधी    की प्रतिमा  लगाये जाने का विरोध करते हुए कहा कि गांधी ने स्वतंत्रता और आजादी के लिए मलावी के संघर्ष में कोई योगदान नहीं दिया. इसलिए हमें लगता है कि मलावी के लोगों पर यह प्रतिमा थोपी जा रही है और यह एक विदेशी ताकत का काम है जो मलावी के लोगों पर अपना दबदबा और उनके मन में अपनी बेहतर छवि बनाना चाहती है.  गांधी की प्रतिमा के के विरोध में करीब 3,000 लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किए तथा परतिमा पर रोक लगाने के लिए अदालत गये थे.

‘गांधी मस्ट फॉल’ समूह ने अपने आवेदन में यह निर्माण नहीं करने के पक्ष में 18 आधार बताए. इन लोगों ने हाई कोर्ट में आरोप लगाया कि गांधी ने अपनी जिंदगी में कई नस्लवादी टिप्पणियां की थी. बुधवार को गांधी की प्रतिमा का विरोध कर रहे लोगों को सफलता भी मिली जब कोर्ट ने प्रतिमा पर रोक लगाने का आदेश दे दिया. न्यायाधीश माइकल तेम्बो ने आदेश दिया कि मुख्य मामले की सुनवाई तक या अदालत का विपरीत आदेश आने तक प्रतिमा के निर्माण के काम पर रोक रहेगी.

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