जिन देशों ने कहा था कि उनको आतंकवाद छू भी नहीं पाया है, वहां के गद्दार भी पकडे जा रहे सीरिया में .. उन्ही में से एक देश ये भी

वो दुनिया बनाम आतंकवाद के इस युद्ध में तटस्थ थे . उनको यकीन था कि उनका देश आतंकवाद रहित है और उनके देश में कहीं से भी कोई भी गद्दार तो दूर आतंकवाद शब्द से संक्रमित भी नहीं है .. लेकिन उन सभी देशो की गलतफहमी एक एक कर के दूर हो रही है . गद्दार हर कहीं पहुच चुके थे और ये भी कहना गलत नहीं होगा कि आख़िरकार आतंकवाद का संक्रमण एक महामारी की तरह दुनिया के कोने कोने तक पहुच चुका है .

ऐसे तमाम देश थे जो सीरिया , ईराक, फिलिस्तीन , चेचन्या आदि मुद्दे को उनके देशो का विषय समझ कर खुद को बहुत सुरक्षित समझा करते थे लेकिन उनको वो सब कुछ देखना पड़ा है जो उनके लिए न सिर्फ सच का सामना करने के समान है बल्कि सीधे सीधे एक सबक है और एक चेतावनी भी आने वाले समय के लिए . इसी क्रम में अब गलतफहमी दूर हो गयी अपेक्षाकृत शांत माने जाने वाले तटस्थ देश कहे जा सकने वाले न्यूजीलैंड की जिसके लिए ये खबर सदमे से कम नहीं है .

ज्ञात हो कि इस्लामिक स्टेट समूह में शामिल हुए न्यूजीलैंड के एक गद्दार को व्यक्ति को सीरिया में पकड़ लिया गया है. उसने ‘ऑस्ट्रेलिया ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ को बताया कि उसे अपने फैसले पर खेद है, वह गुलामी की जिंदगी नहीं जी सकता और वापस घर आना चाहता है. इस गद्दार का नाम मार्क टेलर है जिसके साथ छह अन्य गद्दार गत 2014 में चोरी छिपे और चुपके से इस्लामिक आतंकवादी संगठन ISIS में शामिल हो गए थे. गिरफ्तार हुए मार्क टेलर ने ‘एबीसी’ से कहा कि पांच साल तक इस्लामिक स्टेट के साथ काम करने के बाद वह दिसम्बर में वहां से भाग गया और कुर्दिश बलों को आत्मसमर्पण कर दिया क्योंकि उसकी जिंदगी असहनीय हो गई थी. उसने कहा कि वहां ना खाना था, ना पैसा था, और बुनीयादी जरूरत की चीजें भी नहीं थी.

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