आखिर 26 फरवरी ही क्यों चुना गया था पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का ? क्यों ये ही दिन चुना गया था पाकिस्तान को कुचलने के लिए ?


16 फरवरी 2019.. यही वो दिन था जब इंडियन एयरफाॅर्स के जांबाजों ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में घुसकर एयरस्ट्राइक की थी. यही वो दिन था जिस दिन भारतीय वायुसेना के रणबांकुरों ने पाकिस्तान में घुसकर इस्लामिक आतंकियों को कुचला था. पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना की इस एयर स्ट्राइक में कई आतंकी ठिकाने तबाह हुए और सैकड़ों आतंकी मारे गए थे.

लेकिन भारतीय वायुसेना ने एयरस्ट्राइक के लिए 26 फरवरी का ही दिन क्यों चुना था, इसे लेकर बड़ी खबर सामने आई है. ज्ञात हो कि ये एक ऐसा मिशन था जिसके बारे में आखिरी लम्हों तक किसी को कोई खबर नहीं थी. हमले के बाद पूरी दुनिया को पता चला कि भारत ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की है. अब इस मिशन को लेकर इससे जुड़े सैन्य अधिकारी दिलचस्प किस्से बता रहे हैं. बालाकोट एयरस्ट्राइक 26 फरवरी को ही क्यों की गई थी, इसे लेकर भी बड़ी जानकारी सामने आई है.

बालाकोट एयरस्ट्राइक मिशन के चीफ रहे एयर मार्शल सी. हरि कुमार ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में बताया कि मिशन वाली रात उन्होंने 12 बजे घर जाकर बर्थडे केक काटा, जिससे किसी को शक न हो. बता दें कि सी हरि कुमार एयर स्ट्राइक के दो दिन बाद रिटायर हो गए थे. उन्होंने कहा, ”उसी रात मेरा जन्मदिन था. रात 12 बजे घर से मैसेज आया कि दोस्त केक लेकर जन्मदिन मनाने पहुंचे हैं. किसी को मिशन का शक न हो, इसलिए मैं घर गया, केक काटा और कंट्रोल रूम आ गया”.

उन्होंने बताया कि एयरस्ट्राइक के लिए 25-26 फरवरी की रात तय हुई थी. उससे ठीक 7 दिन पहले हमें इसकी जानकारी दे दी गई थी. दिल्ली के इंडिया गेट पर आकाश मेस की वो शाम हमेशा यादगार रहेगी. उसी रात 12 बजे के बाद मेरा जन्मदिन था और मेरे जेहन में एक बड़ा मिशन था. रिटायरमेंट पार्टी पहले से तय थी, इसलिए मिशन की सीक्रेसी बनाए रखने के लिए उसे कैंसल नहीं किया. पार्टी में मैंने वेटर को बुलाया और उसके कान में कहा कि लाइम कॉर्डियल (नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक) की डबल डोज के साथ पानी देना, ताकि रंग व्हिस्की सा दिखाई दे.

उन्होंने बताया कि पार्टी में 80 ऑफिसर थे. एयरचीफ बीएस धनोआ मुझे लॉन की तरफ ले गए. मुझसे आखिरी तैयारियों के बारे में पूछा और कहा कि जब ऑपरेशन हो जाए तो फोन पर सिर्फ ‘बंदर’ बोल देना. एयर मार्शल सी. हरि कुमार के मुताबिक, ”हम ऐसे समय हमला करना चाहते थे, जब सभी आतंकी एक जगह जमा हों. ये रात का समय हो सकता था. आतंकी ठिकानों पर नमाज से पहले सुबह चार बजे हलचल शुरू हो जाती है. लिहाजा एक घंटे पहले वे अपने बेड पर होते हैं. भारत में उस समय साढ़े तीन बजे होंगे और पाकिस्तान में तीन. उस रात चांद की खास स्थिति थी.

उन्होंने आगे बताया कि 19 फरवरी को पूर्णमासी थी. उस आधार पर मिशन के दिन अर्थात 26 फरवरी को 3 से 4 बजे तक चांद क्षितिज से 30 डिग्री पर होना था. ऐसे में चांदनी एकदम आदर्श थी. उस दिन मौसम की पश्चिमी हलचलों का असर कम था. सटीक बमबारी के लिए हवाएं हमारे अनुकूल थीं. फिर हमारी टीम ने क्या किया वो सबके सामने था. हमने एक्शन लिया जो पूरी तरह से सफल रहा.


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