अब चीन ने माँगा भारत का साथ.. जानिये किस मामले में फंसा है वो

आतंकवाद और सीमा विवाद समेत कई मामलों में भारत के खिलाफ रुख रखने वाला चीन अब भारत का साथ मांग रहा है. चीन कह रहा है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है तथा उसकी इच्छा है कि भरता चीन के साथ आये. दरअसल चीन इस समय अमेरिका के साथ ट्रेड वार में फंसा हुआ है तथा इस मामले में अमेरिका चीन को लेकर बेहद सख्त है. ट्रेड वार को लेकर चीन तथा अमेरिका में तनाव चरम पर है तथा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन को लेकर आक्रामक हैं.

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यही कारण है कि ट्रेड वार में फंसे चीन ने अब भारत का साथ माँगा है. इसके लिए चीन ने भारत के साथ अपने व्यापारिक असंतुलन को लेकर भी बात करने की बात कही है. चीन ने कहा है कि वह व्यापारिक असंतुलन को लेकर भारत की चिंताओं को समझता है और वह उसके साथ इस संबंध में वार्ता के लिए तैयार है. इसके साथ ही चीन ने ट्रेड में ‘एकपक्षीयता और संरक्षणवाद’ के खिलाफ भारत के भी साथ आने की अपील की है. बता दें कि अमेरिका और चीन के बीच बीते कई महीनों से ट्रेड वॉर चल रहा है.

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भारत में चीन के नए राजदूत सन वेइडोंग ने कहा, ‘व्यापारिक असंतुलन को लेकर भारत की चिंताओं को चीन बखूबी समझता है. लेकिन हम यह कहना चाहेंगे कि चीन ने कभी भी भारत के मुकाबले ट्रेड सरप्लस के लिए कोई योजनापूर्वक प्रयास नहीं किया.’ चीनी राजदूत सन ने कहा कि चीन ने भारत से चावल और चीनी के आयात में इजाफे की कोशिशें शुरू कर दी हैं, इसके अलावा चीन भारतीय दवाओं और कृषि उत्पादों के इम्पोर्ट पर भी विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अब भारत को चीन के साथ आना चाहिए.

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चीनी राजदूत ने कहा कि हाल के आंकड़े बताते हैं कि चीन में भारतीय उत्पादों के आयात में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है. इसके अलावा बीते साल चीन के बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में भी दोगुने तक का इजाफा हुआ है. आपको बता दें कि भारत लंबे समय से चीन पर अपने फार्मास्युटिकल मार्केट को भारतीय दवाओं के लिए खोलने का दबाव बनाता रहा है. चीन से भारत का व्यापारिक असंतुलन 95.5 बिलियन डॉलर के मुकाबले 57 अरब डॉलर के करीब ही है.

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भारत में चीनी राजदूत वेंग ने कहा कि इस साल की पहली छमाही में चीन के साथ भारत के व्यापारिक घाटे में 5 फीसदी तक की कमी आई है. इसलिए मुझे यकीन है कि लगातार इस संबंध में प्रयास किए जाने से भारत और चीन के बीच व्यापारिक संतुलन को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के खिलाफ चीन और भारत को मिलकर लड़ाई लड़नी होगी तथा अमेरिका के ट्रेड पॉलिसी से टक्‍कर लेने और इकोनॉमिक ऑर्डर को बेहतर तरीके से बढ़ावा देने के लिए भारत व चीन को एकजुट होना होगा.
चीनी राजदूत ने भारत को सुझाव दिया है कि भारत और चीन अमेरिका के खिलाफ ज्‍वाइंट फ्रंट बना सकते हैं. बता दें कि चीन और अमेरिका के बीच का व्यापार घाटा 539 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है. इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका से आयात होने वाले सामान पर जवाबी शुल्क लगाया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ गया. वहीं भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड को लेकर मतभेद पिछले साल शुरू हुआ जब अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले स्टील और एल्यूमिनियम पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी. भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका से आयात होने वाले 28 उत्‍पादों पर ड्यूटी बढ़ा दी.
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