सिर्फ इस्लाम कबूल कर लेने से बात खत्म नहीं हो जाती पाकिस्तान में.. उसके बाद शुरू होता है एक नया सफर

यदि सिर्फ इतना जानता है कोई कि सिर्फ इस्लाम कबूल कर के पाकिस्तान में उसकी व्यथा खत्म हो जाती है तो यकीनन वो किसी गलतफहमी का शिकार है . पिछले कुछ समय से पाकिस्तान में २ हिन्दू बच्चियों को होली के ही दिन जबरन घर से उठा कर उनका तीन गुने से ज्यादा उम्र के मुसलमानों से निकाह करवा देने की घटना ने सबका ध्यान खींचा था . उसके बाद उस लडकी के लाचार पिता की थाने में न्याय की गुहार ने सबको द्रवित कर दिया था .

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हालात यहाँ तक हो गये थे कि खुल कर इस्लामिक आतंकवाद को संरक्ष्ण देने वालों ने भी उस समय दिखावे एक लिए दर्द व्यक्त करना शुरू कर दिया था . लेकिन अगर कोई सिर्फ इतना जानता है कि पाकिस्तान में अगर वो हिन्दू से मुस्लमान बन रहा है तो उसकी समस्या खत्म हो जाती है तो वो गलत है . उसके बाद उसको बाकायदा एक ऐसे स्थान पर भेजा जाता है जहाँ से उसके अन्दर से वो सब कुछ निकाला जाता है जो उसके कई पीढियों से आ रहे संस्कार होते हैं ..

अगर बात आंकड़ों में की जाय तो इस मामले में अध्ययन करने वाली एक स्थानीय मानवाधिकार ग्रुप साउथ एशिया पार्टनरशिप-पाकिस्तान के अनुसार पाकिस्तान में प्रत्येक साल क़रीब एक हज़ार लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन कराकर मुसलिम बनाते हैं। इसमें से अधिकतर हिंदू लड़कियाँ होती हैं। इसी मामले में पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के अनुसार ऐसी पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए क़रीब 5000 पाकिस्तानी हिंदू प्रत्येक साल देश छोड़कर भारत चले जाते हैं..

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भले ही ऐसे मामलों में भारत के कुछ मीडिया के वर्ग खुद के द्वारा बनाये गये सेकुलरिज्म के बनाए नियमो का पालन कर के खामोश रहते हों पर खुद पाकिस्तान के ही एक मीडिया ‘हेरल्ड’ ने ‘मूवमेंट ऑफ़ सॉलिडरिटी एंड पीस इन पाकिस्तान’ की 2014 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि जबरन धर्म परिवर्तन से उन्हें कभी न ख़त्म होने वाली हिंसा को सहना पड़ता है .. सबसे ज़्यादा मामले अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह आदि करवाने के मामले आते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस आसानी से रिपोर्ट भी दर्ज नहीं करती और कहना गलत नहीं होगा  कि पुलिस खुद भी उसी मजहबी कट्टरपंथ का ही एक अंग होती है .

खुद पाकिस्तानी अख़बार डॉन की 17 अगस्त 2017 की एक सनसनीखेज रिपोर्ट को अगर माना जाय तो पाकिस्तान के रेगिस्तानी कहे जाने वाले थार क्षेत्र में धर्म परिवर्तन कराये गये लोगों के लिए उमेर के पास छोर में एक अस्थाई सेट्लमेंट की पूरी व्यवस्था की गई है.. इसको बाकायदा पाकिस्तानी सरकार ही संरक्ष्ण दिया करती है .. इसका नाम दिया गया है न्यू इसलामाबाद जबकि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद है जो सेकुलरिज्म का झूठा चोला पहने दुनिया को अपनी सहिष्णुता दिखाने की नाकाम कोशिश करती रहती है .

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बताया ये भी जाता है कि न्यू इस्लामाबाद नाम रखने का उद्देश्य कट्टरपन्थियो का ये है कि आने वाले समय में पाकिस्तान की राजधानी ठीक वैसे ही होगी जिसमे जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर रखे लोग होंगे और वहां से हर किसी को इस्लाम कबूल करवाया जाएगा .जमीयत उलेमा-ए-इसलाम (फज़ल) मदरसा में धर्म परिवर्तन के लिए कलीमा पढ़ने के बाद आने वाले ‘नये मुसलिमों’ को न्यू इसलामाबाद में रखा जाता है और उन्हें एक कोर्स पूरा करना पड़ता है।

इसमें उन्हें इसलाम के मायने समझाये जाते हैं। इस कोर्स के पूरा करने पर उन्हें सनद यानी सर्टिफ़िकेट भी दिया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, जमीयत उलेमा-ए-इसलाम (फज़ल) मदरसा के प्रमुख के रूप में जाने जाने वाले मुहम्मद याक़ूब कहते हैं कि एक बार में 40 परिवारों को ही न्यू इसलामाबाद में रखा जा सकता है। यहाँ सिर्फ़ धर्म परिवर्तन कर नये मुसलिम बनने वाले लोगों को ही रखा जाता है। एक बार जब वे कोर्स पूरा कर निकल जाते हैं तो फिर नये लोगों को रखा जाता है।

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