लव जिहाद पर भारत में होती रही राजनीति लेकिन यूरोप ने कर लिया इसको स्वीकार.. 17 पाकिस्तानी पुलिस की गिरफ्त में

हिंदुस्तान की तथाकथित सेक्यूलर राजनीति लव जिहाद को भले स्वीकार न करती हो तथा इसे एक राजनैतिक एजेंडा मानती हो लेकिन यूरोप लव जिहाद के कहर को न सिर्फ समझ चुका है बल्कि स्वीकार भी कर रहा है. आपको बता दें कि यूरोप में हुई एक जांच के बाद नकली शादियों का भांडाफोड़ हुआ है. इसके बाद मामले में आरोपी 17 पाकिस्‍तानियों को गिरफ्तार किया गया है. ये पाकिस्तानी एक एजेंडे के तहत यूरोपीय लडकियों को अपने जाल में फंसाते थे तथा उनसे नकली शादियाँ करते थे.

मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़, एजेंसियों को पता लगा है कि एक ऑर्गनाइज्‍ड क्राइम के तहत इस काम को अंजाम दिया जा रहा था. इसके लिए कई यूरोपियन महिलाओं को शादी का झांसा देकर उनकी भर्ती की गई थी. इन सभी गिरफ्तारियों को बेल्जियम अथॉरिटीज और पुर्तगाल की इमीग्रेशन एजेंसियों के अलावा बॉर्डर सर्विस की ओर से चलाए गए एक ऑपरेशन के तहत पूरा किया गया है.

यूरोपियन एजेंसियों यूरोपूल और यूरोजस्‍ट की ओर से बताया गया है कि पूरे यूरोप में झूठी शादी के नाम पर ठगी करने वाले पुरुषों की जांच इमीग्रेशन के मकसद से की जा रही थी. इसमें से जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें से 17 पाकिस्‍तानी हैं. ये सभी गिरफ्तार पुरुष एक ऑर्गनाइज्‍ड क्राइम ग्रुप का हिस्‍सा हैं. इस ग्रुप में कई महिलाओं की भर्ती की गई थी. यूरोपोल की ओर से बताया गया है कि क्रीमिनल ग्रुप नकली शादियों के जरिए गैर-कानूनी अप्रवसान में शामिल था और इसे विशेषकर पुर्तगाल और पाकिस्‍तानी नागरिकों के बीच अंजाम दिया जा रहा था. इसके लिए पुर्तगाल की महिलाओं की भर्ती की गई थी ताकि वे उन पाकिस्‍तानी पुरुषों से शादी के लिए हामी भर सकें जिनसे वे कभी नहीं मिली हैं.

यूरोपीय सुरक्षा एजेंसी की ओर से आगे बताया गया है कि इसके बदले महिलाओं को हजारों यूरो कैश में मिलते थे. शादी के बाद दंपति बेल्जियम आते और यहां पर उनकी पत्नियों को बेल्जियम की कंपनियों में नौकरी मिल जाती थी. ये लोग कंपनियों में शेयर खरीदते और फिर उनके पतियों को यूरोपियन यूनियन में रहने का मौका मिल जाता. यहां से उन्‍हें रेजीडेंट परमिट आसानी से मिलता और फिर वह गैर-कानूनी तौर पर सामाजिक और दूसरे जरूरी फायदों का मजा लेते. इसके बाद इन शेयर्स को पत्नियों में बांटा जाता. इसके बाद नए लोगों को कंपनियों में पार्टनरशिप मिल जाती. यहां से महिलाएं पुर्तगाल वापस चली जातीं और फिर कभी-कभी पुलिस और दूसरे जरूरी कार्रवाई के लिए बेल्जियम वापस आ जाती. इस जांच की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. अब जब 17 पाकिस्तानी इस मामले में गिरफ्तार किये गये हैं तो पूरे यूरोप में हड़कंप मच गया है.

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