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मुलाकात भारत और इजरायल की, चीख पुकार पाकिस्तान में. आखिर क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक तीन दिवसीय इजरायल यात्रा पर पाकिस्तान अपनी पैनी नजर लगाए हुए है, क्योंकि इस यात्रा से उसे डर है कि उसके क्षेत्र के सामरिक स्थिरता पर बहुत गंभीर प्रभाव पड सकते हैं। एक्सप्रेस ट्रीब्यून के अनुसार, पाकिस्तान अन्य सरकारों के प्रमुखों और राष्ट्राध्यक्षों की द्वीपक्षीय यात्राओं पर आधिकारिक रूप से टिप्पणी नहीं करता है, लेकिन वह मोदी यात्रा पर निकटता से नजर रखे हुए है क्योंकि इसके क्षेत्र की रणनीति स्थिरता पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ सकते है। पाकिस्तान अपने डर का प्रमाण दे चुका है। 
एक पाकिस्तानी समाचार पत्र के मुताबिक, इजरायल भारत को लम्बे समय से हथियारों एवं अन्य रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करता आया है और इन सौदों को दोनों पक्षों ने जानबूझकर गोपनीय रखा है। अब सार्वजनिक रूप से बात करते है दोनों देशो के अपने गहरे रक्षा सहयोग पर। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ जफ़र नवाज जसपाल ने कहा है कि भारत एवं इजरायल के बीच बढ़ती घनिष्ठ दोस्ती और रक्षा सहयोग दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सामरिक संतुलन बिगाड़ेगा।
 
बता दें कि मोदी और नेतन्याहू के बीच मुलाकत के साथ-साथ कुछ अहम समझौते भी हुए है, जिसमें दोनों देशो के बीच हुई डिफेन्स डील से चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ गई है। साथ ही साथ दोनों देशों की मीडिया मोदी-नेतन्याहू के मुलाक़ात को प्रमुख खबरों में स्थान दे इस मुलाकात को गंभीरता से ले रही है। दरअसल, भारत इजरायल से 10 हेरोन टीपी ड्रोन खरीदने जा रहा है।
इस ड्रोन की विशेषता यह है की हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल से लैस है। इसे दूसरे शब्दों में किलर ड्रोन भी कहा जाता है। इसकी मारक क्षमता को देखते हुए इसे देश के रक्षा विभाग में जोड़ने पर देश के रक्षा के लिए लड़ाई में अहम भूमिका निभा सकता है। इस ड्रोन से न केवल पाक अधिकृत इलाको में आतंकी कैम्पो को नेस्तानाबूत किया जा सकता है बल्कि वहाँ छिपे आतंकियों पर अपने सीमा में रहते हुए उनपर निशाना साध उन्हें मार सकते है। 
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