लगभग 5 लाख लोग कत्ल हो चुके सीरिया के आपसी गृहयुद्ध में लेकिन जुबान पर केवल म्यंमार और बौद्ध… ऐसा क्यों ?

सीरिया मौतों पर रोने वाले बौद्धों कि मौतों पर कुछ नहीं बोले ये कैसा मौत पर रोना कि एक इंसान के लिए रोना और दूजे के लिए नहीं रोना. ज्ञात हो कि सीरिया

में पिछले छह सालो से चल रहे गृहयुद्ध में शनिवार को शरणार्थी के अधिकार समूह ने ये दावा किया है कि सीरिया में पिछले छह सालो से चल रहे गृहयुद्ध में चार

लाख 65 हजार से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं.
तर्राष्ट्रीय शरणार्थी अधिकार संगठन के उपाध्यक्ष अबदुल्ला रसूल देमिर ने बताया कि सीरिया में शताब्दी के सबसे गंभीर मानव अधिकारों का हनन चल रहा है और

विश्व के सभी देश ऐसी स्थिति में अपनी आंखों को बंद किए बैठे हैं.

आपको बता दे कि ये संगठन बौद्धों कि हत्यावो पर न जाने कहा ग़ुम था और चुप था.
मौत के आंकड़ों पर बात करते हुए उन्होंने कहा ‘मरने वालों में 26 हजार 466 बच्चे शामिल हैं, जबकि 1.3 करोड़ लोग अपने घर छोड़कर चले गए और शरणार्थी

बन गए। 35 लाख बच्चों को उनके मूलभूत अधिकारों, शिक्षा जैसी चीजों से वंचित कर दिया गया।’ आपको बता दे कि म्यांमार में रोहिंग्यावो ने पूरा का पूरा बौद्धों

से भरे गाव को खत्म कर दिया.

आपको बता दे कि इस्लामिक आतंक का खात्मा करने के लिए रूस ने फिर से हमला किया सीरिया पर जिसमे इसी हफ्ते के शुरुआत में आतंकी संगठन इस्लामिक

स्टेट (आईएस) के कब्जे वाले पूर्वी सीरिया में रूसी आर्मी द्वारा किए गए हवाई हमले में कम से कम 21 लोगों को मार गिराया.

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