मुस्लिम विहीन हो रहा है श्रीलंका का मंत्रिमंडल और प्रशासन… सत्ता ले रहे बौद्ध अपने हाथ में.. तैयार हो रहा एक नया म्यांमार

21 अप्रैल को श्रीलंका के चर्चों तथा होटलों पर सिलसिलेवार भीषण इस्लामिक आतंकी हमलों को 1 महीने से भी ज्यादा समय बीत गया है लेकिन वहां की स्थिति सामान्य होती हुई नजर नहीं आ रही है. श्रीलंका उस रास्ते पर चलता हुआ नजर आ रहा है जिस पर पहले चीन तथा म्यांमार चल चुके हैं. आपको बता दें कि श्रीलंकाई सत्ता मुस्लिम मुस्लिम विहीन होती जा रही है तथा वहां के बौद्ध पूरी तरह से सत्ता को अपने हाथ में ले रहे हैं.

खबर के मुताबिक़, श्रीलंकाई सरकार में शामिल 9 मुस्लिम मंत्रियों तथा 2 प्रांतीय गवर्नरों ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया है. ये इस्तीफे श्रीलंका में पिछले 1 सप्ताह से से जारी बौद्ध समुदे के लोगों के विरोध प्रदर्शन के दबाव में आकर दिए गये हैं. बता दें कि ईस्टर पर हुए आतंकी हमलों के सिलसिले में तीन मुस्लिम मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर चार दिनों से बहुसंख्यक बौद्ध समुदाय के हजारों लोग कैंडी में प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों में बौद्ध समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सांसद अतुरालिए रतना थिरो भी शामिल थे, जो बौद्ध भिक्षु भी हैं.

अतुरालिए तीनों मंत्रियों के इस्तीफे और मामले की जांच की मांग को लेकर कैंडी में चार दिन से आमरण अनशन कर रहे थे. अतुरालिए का आरोप है कि तीनों मुस्लिम मंत्रियों के संबंध कट्टरपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) से हैं. श्रीलंका के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री रिशथ बाथिउथीन पर आईएसआईएस से जुड़े स्थानीय इस्लामिक समूह नेशनल तौहीद जमात को समर्थन देने का आरोप लगा. इसी समूह ने ये हमले किए थे जिसमें 258 लोगों की जान चली गई थी.

श्रीलंका की 225 सदस्यीय संसद में 19 मुस्लिम हैं और उनमें से नौ के पास कैबिनेट, राज्य और उपमंत्री के पद हैं. अधिकारियों ने बताया कि पश्चिमी प्रांत के गवर्नर अजाद सैले और पूर्वी प्रांत के गवर्नर मल्म हिस्बुल्ला ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना को अपना इस्तीफा सौंपा, इसके बाद सभी 9 मुस्लिम मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया. राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने इनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है.

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