राष्ट्रभाषा हिन्दी का बोलबाला अब नासा में भी.. दुनिया के कोने-कोने में बोली जायेगी हिंदी

हिंदुस्तान में तमाम ऐसे कथित पढ़े-लिखे लोग मिल जायेंगे जिन्हें राष्ट्रभाषा हिंदी बोलने में शर्म का अनुभव होता है. ऐसे लोगों के लिए हिंदी बोलने वाले लोग पिछड़े होते हैं लेकिन अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में राष्ट्रभाषा हिन्दी का बोलबाला सुनाई देगा तथा दुनिया के कोने-कोने में हिन्दी बोली जायेगी. खबर के मुताबिक़, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा दुनिया भर को हिंदी सिखाने और भारतीय धरोहरों की जानकारी देने के लिए वित्तीय मदद करेगी.

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प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक़, नासा की मदद से एक अमेरिकी योजना के तहत ऐसे वीडियो तैयार किए गए हैं जिनमें वैज्ञानिक पद्धति से हिंदी सिखाई जाएगी. इसके अतिरिक्त भारतीय धरोहरों की विस्तृत जानकारी को भी इन वीडियो में शामिल किया गया है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी की मदद से दोनों विषयाें को आसान बनाने की कोशिश इस प्रोग्राम की प्राथमिकता है. इस प्रोग्राम का नेतृत्व वेद चौधरी करेंगे, उनकी संस्था ‘एजूकेटर्स : सोसायटी फॉर हेरिटेज ऑफ इंडिया’ स्टारटॉक योजना का संचालन कर रही है.

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जानकारी मिली है कि नासा ने इसके लिए 62.71 लाख रुपये (करीब 90 हजार डालर) दिए हैं. इस योजना को मेरीलैंड विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय विदेशी भाषा केंद्र की देखरेख में चलाया जा रहा है. इस योजना के अंतर्गत आमेर का किला, हवा महल, जंग रहित दिल्ली का लौह स्तंभ, कुतुब मीनार, चांद बावड़ी, जयपुर फुट मुख्यालय जहां से दुनियाभर के 80 देशों के लिए कृत्रिम अंग तैयार किए जाते हैं को शामिल किया गया है. इस अभियान तथा योजना के बाद हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी की पहुँच दुनिया के कोने कोने में होगी.

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