भारत की फौज ने की एक और सर्जिकल स्ट्राइक.. इस बार निशाना थे बौद्धों के हत्यारे रोहिंग्या आतंकी, साथ में थी म्यांमार की भी फौज

LOC पार पाकिस्तान में इस्लामिक आतंकी दल जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर इंडियन एयरफोर्स की एयरस्ट्राइक के बाद अब भारतीय फौज ने एक और सर्जिकल स्ट्राइक की है. इस बार जांबाज भारतीय सेना बौद्धों के हत्यारे रोहिंग्या आतंकियों पर कहर बनकर टूटी है. मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्‍मद के ठिकानों पर की गई हवाई कार्रवाई के कुछ दिन बाद ही भारतीय सेना ने अब म्‍यांमार सीमा पर मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों को नेस्‍तोनाबूद कर दिया है. भारतीय सेना की इस कार्यवाई में म्यांमार की फौज ने भी साथ दिया है.

भारतीय सेना ने ये सर्जिकल स्ट्राइक रोहिंग्या आतंकी समूह अराकान आर्मी और नागा आतंकी समूह NSCN (K) के खिलाफ की है तथा इनके आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया है. जानकारी के अनुसार, उत्तर पूर्व के लिए बड़े और अहम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट, जो म्‍यांमार में सितवे बंदरगाह के जरिये कोलकाता से मिजोरम से जोड़ते हैं, इन आतंकी संगठनों के निशाने पर थे. म्यांमार का विद्रोही समूह अराकान आर्मी ने मिज़ोरम सीमा पर नए ठिकाने बनाए थे, जो कलादान प्रोजेक्‍ट को निशाना बना रहे थे. अराकान आर्मी को काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी द्वारा नॉर्थ बॉर्डर चीन तक ट्रेनिंग दी गई. सूत्रों के अनुसार, विद्रोहियों ने अरुणाचल से सटे क्षेत्रों से मिज़ोरम सीमा तक की 1000 किमी की यात्रा की.

जानकारी के मुताबिक़, पहले चरण में मिजोरम की सीमा पर नवनिर्मित शिविरों को ध्‍वस्‍त करने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त अभियान शुरू किया गया था, जबकि ऑपरेशन के दूसरे भाग में ने टागा में NSCN (K) के मुख्यालय को निशाना बनाया गया और कई शिविरों को नष्ट कर दिया गया. सूत्रों के अनुसार, रोहिंग्या आतंकी समूह अराकान आर्मी और नागा आतंकी समूह NSCN (K) के खिलाफ 2 सप्ताह लंबा संयुक्त भारत-म्यांमार ऑपरेशन चला. आतंकी समूहों ने कलादान मल्टी मोडल प्रोजेक्ट की तरह भारत की कनेक्टिविटी परियोजनाओं के खिलाफ हमले की योजना बनाई थी.

भारतीय सेना की इस एक और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जहाँ पूरा देश अपनी जांबाज सेना के शौर्य तथा पराक्रम को सैल्यूट कर रहा है तो वहीं ये भी सवाल खडा हो रहा है कि क्या इस सुर्जिकल स्ट्राइक का भी सबूत माँगा जाएगा? जिस तरह उरी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगा गया, पुलवामा हमले के बाद हुई एयरस्ट्राइक में 350 से ज्यादा आतंकियों की मौत का सबूत माँगा गया, क्या उसी तरह रोहिंग्या आतंकी ठिकानों पर हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक का भी सबूत माँगा जाएगा? ये सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि देश के अंदर छिपे तमाम कथित सेक्यूलर बुद्धिजीवी तथा मानवाधिकारियों को रोहिंग्या आक्रान्ताओं से बेहद लगाव है.

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