भारत में कसाब के लिए मांगी गई थी दया तो पाकिस्तान ने बरी किया सरबजीत के हत्यारों को.. धर्मनिरपेक्षता की सीमायें भारत के बाहर ख़त्म ?

हिंदुस्तान में आतंक फैलाने वाले नापाक मुल्क पाकिस्तान का घिनौना चेहरा एक बार पुनः सामने आया है. खबर के मुताबिक़, पाकिस्तान की एक अदालत ने शनिवार को भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की हत्या के दो मुख्य संदिग्ध आरोपियों को बरी कर दिया. सरबजीत की लाहौर के कोट लखपत जेल में 2013 में हत्या कर दी गई थी. सरबजीत वहां पर आतंकी घटनाओं के दोष में सजा काट रहे थे जबकि वास्तव में वह गलती से सीमा पार पहुंच गए थे. इन दो आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया है.

सरबजीत की ह्त्या करने वालों को बरी करके पाकिस्तान ने हिंदुस्तान में बैठे उन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों के मुंह पर तमाचा मारा है जिन्होंने मुंबई आतंकी हमला करने वाले अजमल कसाब के लिए दया याचिका लगाई थी. लाहौर कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि लाहौर अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश मोहम्मद मोइन खोखर ने गवाहों के पलट जाने के बाद आरोपियों- आमिर टाम्बा और मुदस्सर को बरी कर दिया. अधिकारी ने कहा, ‘कोर्ट में एक भी गवाह ने बयान नहीं दिया. कोर्ट ने सूबत के अभाव में उन्हें बरी कर दिया.’ उन्होंने बताया कि दोनों विडियो लिंक के जरिए कोट लखपत जेल से कोर्ट में पेश हुए. सुरक्षा कारणों से उन्हें कोर्ट नहीं लागा गया था. आमिर और मुदस्सर अन्य मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने पर जेल में बंद थे.

सरबजीत पर हमला करने के मामले में दो कैदियों आमिर तांबा आफताब और मुदस्सर के खिलाफ हमले के लिए मामला दर्ज किए थे. उन दोनों ने कथित तौर पर जांच अधिकारियों से कहा था कि उन्होंने सरबजीत पर इसलिए हमला किया था, क्योंकि उसने लाहौर में बम विस्फोट किए थे. आश्चर्य की बात ये है कि दोनों  ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने सरबजीत की ह्त्या की है लेकिन इसके बाद भी उन दोनों बरी किया जाना पाकिस्तान के वास्तविक चेहरे को दिखाता है.

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