सिर्फ दाऊद और शकील जैसे हत्यारों को ही नहीं, पाकिस्तान ने पनाह दी उस दुर्दांत आतंकी को भी जिसने कत्ल किया था भारत के राजनयिक का…

पाकिस्तान ने जैसे भारत देश की दोस्ती की पीठ पर छुरा घोंपा वैसे ही पाकिस्तान ने और भी कई देश की पीठों पर छुरा घोंपा है। ब्रिटेन के लेस्टरशर में फ़रवरी 1984 में भारतीय राजनयिक रवींद्र म्हात्रे की हत्या के बाद तीन संदिग्ध हत्यारे पाकिस्तान भाग गए थे, जिसमें पाकिस्तानियों ने हत्यारों का साथ देते हुए उनको गुप्त जगह छुपा दिया था जिस वजह से ब्रिटेन सरकार उन हत्यारों को पकड़ने में नाकाम रही। ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव ने कुछ गोपनीय दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया है।

सार्वजनिक किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि रवींद्र म्हात्रे के संदिग्ध हत्यारों की पाकिस्तान में मौजूदगी को नकारा गया या उन्हें ढूँढ पाने में बार-बार असमर्थता जताई गई। 48 वर्षीय म्हात्रे की हत्या में जिन कश्मीरी चरमपंथियों का हाथ था, उन्होंने म्हात्रे के अपहरण के बाद नकद फ़िरौती की माँग भी की थी और अपने नेता मक़बूल बट्ट को रिहा करने की भी माँग की थी।
अब सामने आए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि वेस्ट मिडलैंड पुलिस ने पाकिस्तान को बताया था कि तीन संदिग्ध हत्यारे पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हैं, लेकिन पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने उन्हें पकड़ने और ब्रिटेन के हवाले करने की दिशा में कुछ नहीं किया। उस वक़्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल ज़िया उल हक़ थे। पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि अगर “ये लोग पाकिस्तान में हुए तो उनका ब्रिटेन प्रत्यर्पण कर दिया जाएगा”, लेकिन पाकिस्तान ने कभी नहीं माना कि वे वहाँ थे।
दस्तावेज़ों के मुताबिक़, ब्रितानी हाई कमिश्नर रिचर्ड फ़िजिश-वॉकर ने अपने अधिकारियों को लिखा कि उन्होंने प्रत्यर्पण की बात मानी तो है, लेकिन पहला क़दम ये पक्का करना होगा कि ये लोग पाकिस्तान में हैं, मुझे इस बात का विश्वास नहीं है कि पाकिस्तानी उन्हें ढूँढने या पकड़ने के मामले में कितने गंभीर हैं। भारत में तिहाड़ जेल में मकबूल बट्ट को फांसी दे दी गई थी और ब्रिटेन में तीन संदिग्धों को अदालत ने दोषी करार दिया था, जिनमें से दो ब्रिटेन में पकड़े गए थे और तीसरा व्यक्ति अमरीका से गिरफ़्तार किया गया था।
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