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आतंक रोके पाक, जवानों पर हमला होगा तो चुप नहीं रहेगा भारत… देगा करारा जवाब

पाकिस्तान की हरकतों को देखते हुए अब अमेरिका ने भी उसे
चेतावनी देनी शुरु कर दी है। बता दें कि अमेरिका के एक वरिष्ठ सांसद ने पाकिस्तान
से उसके क्षेत्र के भीतर सक्रिय हो रहे कट्टरपंथी ताकतों पर कार्यवाही करने की
मांग करते हुए इस्लामाबाद को आगाह किया है कि यदि समय रहते पाकिस्तान अपनी हरकतों
से बाज नहीं आया तो भारत भी चुप बैठने वालों में से नहीं है। भारत भी पाकिस्तान की
सभी हरकतों का दुगुनी ताकत के साथ जवाब देने की हिम्मत और वजुद रखता है।

 

हाउस डेमोक्रेटिक कॉकस के अध्यक्ष जो क्राउले ने बताया कि
पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के कारण पिछले कुछ महिनों से
भारत—पाक सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई
है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन से पाक पर ज्यादा दबाव बनाने की मांग की।

ताकि वो अपनी
हरकतों पर लगाम लगा सकें। इसके अलावा एक प्रश्न के जवाब में सांसद ने कहा है कि तनावपूर्ण
स्थिति के जिम्मेदार इन कट्टरपंथियों को पाकिस्तान का समर्थन है, जिससे वो आए दिन
इस तरह की हरकतों को अंजाम देते रहते है। इस पर ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान  पर भारत- पाक सीमा पर तनाव फैलाने के लिए
जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर दबाव
बनाते हुए और प्रयास करने की हिदायत दी है।

उन्होंने कहा कि मेरा
मानना है कि यहां इस बात पर जोर है कि पाकिस्तान को अपने क्षेत्र के अंदर सक्रिय
हिंसक और कट्टरपंथी संगठनों के सफाए के लिए और प्रयास किए जाने की जरूरत है
क्योंकि अगर भारत के नागरिकों और सैनिकों पर हमले होते रहे तो वह चुप नहीं बैठेगा।

आगे सांसद ने दोनों देशों के बीच शांति के मुद्दे को लेकर कहा कि
इन दोनों देशो को चल रहे मुद्दो पर आपसी बातचीत और दिपक्षीय तरीके से हल करना
चाहिए। क्राउले ने आगे अमेरिका को लेकर कहा कि मेरा मानना है कि अमेरिका इस बारें
में बहत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान का मित्र होने के नाते
अमेरिका क्षेत्र में शांति और समन्वय बनाने के लिए भर्सक प्रयास करेंगा और इसके
लिए वह मित्र देशों से भी कोई सहायता लेनी पड़ी तो लेगा और उनसे कोई अन्य मार्ग
तलाशने के लिए दबाव भी बना सकता है।  

   

उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान नीति पर भारत
से जानकारी मांगेगा। माना जा रहा है कि उसे अंतिम रूप दिए जाने के लिए काम चल रहा
है।
क्राउले ने कहा, मैं यकीनन यह उम्मीद करता हूं कि राष्ट्रपति और विदेश
मंत्रालय भारत सरकार की राय को ध्यान में रखेगा। भारतीय जनता और सरकार ने लगातार
आतंकवादी हमले झेले हैं। 

 

क्राउले ने ये भी कहा है कि कोई भी सिदांत बनाने से पहले अपने सम्बंधों को
भी ध्यान में रखना होगा। यानि की अफगानी जनता और भारतीय जनता के बीच के ऐतिहासिक
संबंधों को भी ध्यान में रखते हुए कोई कदम उठाना होगा। उनके सिदांत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शांति और समन्वय को बनाने
रखने में मददगार साबित होंगे।

 

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