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बैसाख दिवस समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी, विश्व शांति का दिया संदेश

कोलंबो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय श्रीलंका यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को पीएम मोदी बौद्ध धर्म के सबसे बड़े पर्व अंतर्राष्ट्रीय बैसाख दिवस में शामिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन श्रीलंका, भारत और सभी बौद्ध धर्म के लोगों के लिए ऐतिहासिक है।

बुद्ध की धरती से शुभकामनाएं लेकर आया हूं, श्रीलंका का भारत से पुराना रिश्ता है। बता दें कि मार्च 2015 के बाद पीएम मोदी की श्रीलंका के लिए यह दूसरी यात्रा है। उनका यह दौरा श्रीलंका के राष्ट्रपति सिरिसेना के निमंत्रण पर हो रहा है। इसी दौरान पीएम ने कहा कि मैं सम्यकसमबुद्ध, पूर्ण चैतन्य की भूमि से अपने साथ 1.25 अरब लोगों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। हमारा क्षेत्र सौभाग्यशाली है कि उसने दुनिया को बुद्ध और उनके उपदेश जैसे अमूल्य उपहार दिये।

बैसाख दिवस भगवान बुद्ध के जन्म, उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति तथा उनके महापरिनिर्वाण के संदर्भ में मनाया जाता है। बुद्ध के संदेशों को दोहराते हुए पीएम मोदी ने याद किया कि शांति से ज्यादा बड़ी कोई संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के संदेश आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। श्रीलंका की जनता को जोड़ने की कोशिश करते हुए पीएम ने कहा कि भारत में आप एक दोस्त और एक साझेदार को पाएंगे जो राष्ट्र निर्माण में आपके साथ खड़ा रहेगा। इसके साथ ही पीएम ने वाराणसी और कोलंबो के बीच साधी विमान सेवा शुरू करने का एलान भी किया।

पीएम मोदी ने कहा कि मेरे तमिल भाई और बहन अब काशी विश्वनाथ की भूमि वाराणसी आसानी से आ-जा सकेंगे। पीएम मोदी की यात्रा का उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच पारंपरिक संबंधों को मजबूत करना है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चिंता दुनिया में बढ़ती हिंसा है। कई क्षेत्रों में आतंकवाद और नफरत की भावना बढ़ रही है, इससे देशों में बातचीत के रास्ते बंद हो रहे हैं। इससे बचने के लिए बुद्ध का शांति का रास्ता ही कारगर साबित होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने पीएम से गुरुवार को मुलाकात की और वर्षों से दोनों देशों के बीच चले आ रहे द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की। भारतीय उच्चायुक्त तरनजीत सिंह संधु ने मीडिया से कहा कि पीएम मोदी के साथ राजपक्षे की बातचीत बहुत सौहाद्रपूर्ण रही और वह भारत श्रीलंका के बीच वर्षों से चले आ रहे सहयोग पर प्रसन्न है। वहीं. उच्चायुक्त ने बताया कि पीएम मोदी ने राजपक्षे से मुलाकात उनके अनुरोध पर की है।

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