वो माँ बेटी पिला रही थी पल्स पोलियो की दवाएं… लेकिन कट्टरपंथियों ने इसको समझ गैर इस्लामिक

यदि आतंकवादियों को सुरक्षा मुहैया करानी हो तो पाकिस्तान सरकार सबसे पहले कदम उठाती है. लेकिन जो लोग सामजिक सेवा में लगे है उनके लिए न पाक सरकार सोयी रहती है. और घटना का अंदेशा होने के बाद भी कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करती है. क्यूंकि वो लोग आतंकि नहीं है शायद इसलिए?

दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के शहर क्वेटा में पोलियो की दवा पिलाने वाली दो महिला स्वास्थ्य कर्मियों की बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी.

सकीना बीबी (38) और उनकी बेटी रिज़वाना (16) बच्चों को पोलियो की खुराक दे रहीं थीं. तभी मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने उन पर गोलियां बरसा दी. इससे पहले भी इस्लामिक चरमपंथी पोलियो दवा पिलाने वाली टीमों को निशाना बनाते रहे हैं. यह पहला मामला नहीं जब पोलियों कर्मियों पर हमला नहीं किया गया हो . इन चरमपंथी गुटों का हास्यास्पद आरोप है कि पोलियो की खुराक का ये अभियान मुसलमानों को नपुंसक बनाने की पश्चिमी देशों की साजिश है.

 

पुलिस के अनुसार पोलियो की दवा पिलाने वाली टीम को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई थी, पुलिस अधिकारी नसीबुल्लाह ख़ान ने बताया कि मारी गईं महिला स्वास्थ् कर्मी बलूचिस्तान प्रांत में चलाये जा रहे पोलियो उन्मूलन अभियान का हिस्सा थीं. बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर अब्दुल कुदुस बिज़ेन्जो ने इस हमले की भर्त्सना करते हुए कहा है कि यह पाकिस्तान की “कायरतापूर्ण और आतंकवादी” हरकत है.

आपको बता दें कि w.h.o के अनुसार, पाकिस्तान, नाइजीरिया और अफ़ग़ानिस्तान ऐसे देश है जहाँ इस्लामिक चरमपंथियों के विरोध के कारण पोलियो उन्मूलन अभियान कामयाब नहीं हो सका है

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