फिलिस्त्तीनी गाँव ध्वस्त करने का आदेश देने वाली इजरायल की अदालत को इजरायल की सेना ने बोला “बहादुर”

oभले ही दुनिया के तमाम तथाकथित सेकुलर देश और खाड़ी इस्लामिक देश इजरायल के तमाम फैसलों का विरोध अन्तराष्ट्रीय मंचो से कर रहे हों लेकिन वहां की अदलत ने अपने सैनिको का खुल कर साथ दिया है और आतंकवादियो का लंच पैड बन चुके पूरे गाँव को ध्वस्त करने का आदेश खुद से आगे बढ़ कर अपने सैनिको को दिया . इजरायल की फ़ौज की तरह वहां के जजों के मनोबल को भी अन्तराष्ट्रीय दबाव नहीं झुका पाया और उसने अपने सैनिको की कार्यवाही को एकदम सही बताते हुए पूरी छूट दे दी आतंकियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के अभियान की . इसी क्रम में अब उस गाँव से 180 लोगो को जबरन निकाला जाने लगा है जिसका तमाम मुस्लिम देश विरोध कर रहे हैं .

लेकिन अपनी अदालत द्वारा खुद का मिला ऐसा साथ इजरायल के सैनिको को भूला नहीं और उन्होंने अपनी अदालत को अपने अंदाज़ में धन्यवाद दिया है .  इजरायली रक्षा मंत्री एविगडोर लिबरमैन ने ट्विटर पर न्यायियों के फैसले की सराहना की और इसे “बहादुर” कहा। लिबरमैन ने कहा “खान अल-अहमर को खाली कर दिया जाएगा। मैं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को उनके बहादुर फैसले के लिए बधाई देता हूं। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। कोई भी हमारी संप्रभुता को मजबूत करने से नहीं रोक सकता है,”। इतना ही नहीं इजरायली सैनिको ने उन न्यायाधीशों को खुले कंठ से सराहा है जिन्होंने ये साफ कर दिया कि इजरायल विरोधी किसी भी बात का अड्डा वहां की अदालतें नहीं बनने दी जायेगी .

इस फैसले की गूँज पूरी दुनिया में गई है . कई देश सेना और न्यायपालिका के इस सामूहिक सहयोगात्मक कार्य को अन्य देशो के लिए सीखने हेतु एक बेहतर उदाहरण मान रहे हैं . संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि इजरायल के अधिकारियों ने 2010 और 2014 के बीच फिलिस्तीनियों द्वारा सभी परमिट अनुरोधों में से केवल 1.5 प्रतिशत को मंजूरी दे दी है। जुलाई की शुरुआत में, इज़राइली बुलडोजर ने खान अल-अहमार में कई तंबू और अन्य संरचनाओं को नष्ट कर दिया, स्थानीय निवासियों के साथ टकराव भी हुआ। उस टकराव में पत्थरबाजी आदि हुई थी जिसको इजरायल के सैनिको ने बलपूर्वक कुचल दिया था .

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