Breaking News:

भारत की आज़ादी के लिए बलिदान हुए जिन क्रांतिवीरों को भारत के ही इतिहास में नहीं मिली जगह उन्हें अमेरिका शामिल कर रहा अपने पाठ्यक्रम में

ये एक बड़ा तमाचा है उन तथाकथित नकली इतिहासकारों के मुह पर और एक बड़ा सवाल है उन झोलाछाप कलमकारों के लिए जिन्होंने अपनी बिकी स्याही और पक्षपाती मानसिकता से भारत के ही वीरों का भारत में ही सम्मान नहीं होने दिया . भारत के वास्तविक इतिहास को विकृत करने वाले उन तमाम नकली कलमकारों को एक बड़ा और कड़ा सबक देते हुए अमेरिका उन वीरो को शामिल करने जा रहा है अपने पाठ्यक्रम में ..

ये वीर हैं ग़दर पार्टी के वो योद्धा जिन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ शस्त्र के साथ क्रान्ति का उद्घोष किया था और चरखे आदि की कहानी को झुठला दिया था . यद्दपि बिकी स्याही से इतिहास लिखने वालों ने बहुत अन्याय किया और उन शूरवीरो को इतिहास में कहीं भी जगह नहीं दी और उन्हें छोड़ दिया गुमनाम बलिदान के रूप में . प्राप्त सूत्रों के अनुसार अमेरिका के ओरेगन राज्य के स्कूलों के विद्यार्थियों को जल्द ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाली गदर पार्टी के बारे में पढ़ने को मिलेगा. ये वही ग़दर पार्टी है जिसके करतार सिंह साराभा जैसे वीरों ने शौर्य की एक नई गाथा लिखी थी ..

सबसे ख़ास बात ये है कि भारत की आज़ादी के लिए गठित किये गये बलिदानियों के संगठन गदर पार्टी की स्थापना के 105 साल पूरे होने का जश्न अमेरिका में मना जिसे भारत की नकली धर्मनिरपेक्षता के चलते ज्यादा लोग जानते ही नहीं है . विदित हो कि क्रांतिकारी समूह गदर पार्टी की स्थापना के 105 साल पूरे होने के मौके पर ओरेगन के शीर्ष अधिकारियों ने यह घोषणा की. ऐतिहासिक शहर एस्टोरिया में कुछ भारतीय-अमेरिकी परिवार हैं लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 1910 में 74 हिंदू पुरुष यहां आए थे जिनमें से ज्यादातर पंजाब के सिख थे.लकड़ी काटने वाली स्थानीय कंपनी में श्रमिक के रूप में काम करने वाले इन भारतीयों के वंशज कल गदर पार्टी के पहले स्थापना सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये एकत्रित हुए थे. ओरेगान के एटॉर्नी जनरल एलेन एफ रोजनब्लम ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना राज्य के स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी. 

Share This Post