संसार के सबसे खुद्दार देशों देशों की लिस्ट में शामिल होने की राह पर म्यांमार… रोहिंग्या मामले पर अंतर्राष्ट्रीय अदालत के फैसले पर दिया ये जवाब

अभीए तक इस्लामिक आतंक के खिलाफ, मजहबी चरमपंथ के खिलाफ आक्रामक रुख रखने वाले देशों का नाम लिया जाता था तो उसमें इजराइल तथा रूस का नाम शीर्ष पर होता था. लेकिन लगता है कि म्यांमार ने इजराइल को भी पीछे छोड़ दिया है तथा म्यांमार अब दुनिया का सबसे खुद्दार देश बनने की राह पर है तथा अपने देश की एकता, अखंडता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. रोहिंग्या आतंकियों के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को लेकर म्यांमार UN तक के निशाने पर आ चुका है लेकिन लगता है कि म्यांमार को इन आलोचनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.

म्यांमार में रोहिंग्या आतंकियों के खिलाफ बेहद कड़ी कार्यवाही करने वाला म्यांमार अपने रुख में नरमी लाने को तैयार नहीं है. हालांकि इस मामले में थोड़ी उम्मीद तब जागी थी जब अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने इस मामले में म्यांमार सरकार को यह अत्याचार रुकवाने के साथ-साथ इस मामले की जाँच करने के भी आदेश दिए थे लेकिन अब म्यांमार सरकार ने भी इस आदेश को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है तथा कहा है कि वह किसी पर अत्याचार नहीं कर रहा है लेकिन जो भी म्यांमार की एकता तथा अखंडता के लिए खतरा बनेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. म्यांमार सरकार के इस रुख से न सिर्फ संयुक्त रास्त्र बल्कि पूरी दुनिया भौचक्की है लेकिन म्यांमार आपने रुख पर द्रढ़ है.

इतना ही नहीं शुक्रवार को म्यांमार की सरकार ने इस आदेश को खारिज करने की वजह बताते हुए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (आईसीसी) पर ही आरोप लगा दिए. दरअसल म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय की ओऱ से हाल ही में एक बयान जारी किया गया है जिसमे कहा गया है कि आईसीसी का यह फैसला एक दोषपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा है और इसकी कानूनी योग्यता पर भी संदेह है. इसके साथ ही म्यांमार सरकार ने यह भी कहा है कि अब वो इस मामले में मीडिआ से किसी तरह की बात भी नहीं करेगी. म्यांमार ने कहा कि वह आईसीसी का सम्मान करता है लेकिन म्यांमार के लिए पहली प्राथमिकता उसके देश की सुरक्षा करना है तथा इसके लिए वह किसी भी हद तक जाएगा. म्यांमार ने कहा कहा कि निर्दोषों पर कोई अत्याचार नहीं हो रहा लेकिन देश के दुश्मनों से निपटना उनका प्रथम कर्तव्य है.

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