जानिए क्या क्या हराम घोषित हो चुका है मुस्लिम जानकारों द्वारा .. रेलगाड़ी और हवाई जहाज़ तक हैं शामिल

जब से फेसबुक लाईक हराम हुआ है मिश्र के रक मुफ़्ती द्वारा उसके बाद बहस छिड़ गई है कि क्या हराम है और क्या हलाल ? जानिए पूरी लिस्ट इस हराम और हलाल की ..युरोप में जब प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार हुआ तो उसे इस्लाम में हराम करार दे दिया गया. क्योंकि उससे पहले मुस्लिम उलेमा वज़ू करके कुरान व हदीस की किताबों को हाथों से लिखते थे. उलेमाओं का मानना था कि ये नापाक मशीन है, जिस पर अल्लाह और रसूल का कलाम छापना हराम है लेकिन अब ये पूरी तरह स्वीकार कर के हलाल मान ली गयी है ..
लाउडस्पीकर जब आया तो उसकी आवाज़ को गधे की आवाज़ से तुलना कर उसे शैतानी यंत्र करार दे दिया गया. लेकिन आज हर मस्जिद और आलिम के मजलिस के लिए लाऊडस्पीकर जरूरी है और जब कोई सरकार उसे बंद करने का आदेश जारी करती है तो इसे मुस्लिमों के साथ अन्याय घोषित कर के मंदिरों से भी हटाने की मांग होती है .
जब भारत की रक्तधमनी कही जाने वाली यात्रा का सबसे बड़ा स्रोत रेलगाड़ी आई तो कई उलेमाओं ने फरमाया था कि कयामत की एक निशानी ये भी बताई थी कि लोहा लोहे पर चलेगा, लेकिन आज तमाम उलेमा उसी रेलगाड़ी के इसी लोहे के बर्थ पर बाकायदा आराम के साथ बिना डर के सफर करते देखे जा सकते हैं..
हवाईजहाज का जब चर्चा आम हुआ, तो कई उलेमाओं ने कहा कि जो इस लोहे में उड़ेगा उसका फौरन ही निकाह खत्म माना जाएगा. लेकिन जाहिर है कि आज इसी लोहे पर उड़ कर मुसलमान तमाम मज़हबी यात्राएं करते हुए नेकियां बटोर रहे हैं.
अंग्रेजों ने जब नई चिकित्सा पद्धति अपनाया तो टीके पर भी फतवा लगा, ऐसी लम्बी लम्बी बहसें हुईं कि अगर उन्हें एक जगह जमा करके पढ़ा जाए तो आदमी यकीन नही कर पायेगा सोच के उस स्तर तक को भी .. यद्द्पि पाकिस्तान मे टीके पर अभी भी वही फतवा कायम है .
मुर्गियों पर भी फतवे लगे हैं कई बार . एक फतवे के अनुसार ऐसी घरेलू मुर्गी जो बाहर से दाना चुग कर आई हो उसे हलाल नहीं किया जा सकता. पहले उसे तीस दिनों तक दड़वे में रखा जाए फिर हलाल किया जाए.
पोल्ट्री फार्म की मुर्गी आई थी तो उसके अंडों पर फतवा लगा, क्योंकि उन अंडों का कोई बाप नहीं था. लेकिन आज उन अंडों को आराम से नोश फरमाया जाता है कई दावतों में जिस से कोई दिक्कत किसी को नहीं होती .
जिस दान को प्राणदान या महादान कहा जाता है वो पुण्य कार्य रक्तदान को भी हराम कर दिया गया लेकिन आज देश में ऐसा कौन सा अस्पताल है जहां ये सहूलियत मौजूद न हो. अब तो रक्तदान नेकी का काम है.
फोटो खिंचाना हराम है लेकिन आज कौन सा ऐसा मुसलमान है जो इससे इनकार करता हो. सऊदी अरब जैसा कट्टर मुस्लिम देश भी नहीं. 
टी वी को हराम ही नहीं बल्कि उसे शैतानी डिब्बा कहा गया. जमाअतुतदावा के एक मासिक पत्रिका में उसके खिलाफ लगातार लेख छपते रहे. लेकिन आज उसी के बड़े रहनुमा इसी शैतानी डिब्बा में अपनी ईमान से भरी तकरीर से उम्मत को नवाजते रहते हैं. और भी बड़े बड़े उलेमा तो ज्यादा समय इसी डिब्बे में गुजारते हैं जिसमें आतंकी ज़ाकिर नाइक तक शामिल है..
देवबन्द ने तो नेलपॉलिश और महिलाओं का ब्यूटीपार्लर जाना भी हराम माना था लेकिन आज कश्मीर में यासीन मलिक जैसे आतंकियों की बीबीया उनके फ़रमान की खुली धज्जी उड़ाती हैं .. सबने ओवैसी के बेटी की सगाई भी देखी था जिसमे पाश्चात्य अंदाज़ का पूरा प्रदर्शन हुआ था ..
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