पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री खान की हत्या के लिए अमेरिका ने पूरे पाकिस्तान में खोजे शूटर. वो नहीं मिले फिर भी हुई थी हत्या. खुलासे से सनसनी

इसको कहा जाता है राष्ट्रीय सम्मान से भी बड़ा हमला जिसमे युद्ध से बड़ी घाव झेलता है कोई राष्ट्र . ज़रा सोचिये की किसी देश के प्रधानमंत्री की कोई देश हत्या करवा दे और इसके बाद भी वो देश उसके चरणों में पड़ा रहे .. ऐसा हुआ है पाकिस्तान में जहाँ एक नए खुलासे से पाकिस्तान की नकली खुद्दारी पूरी दुनिया में बेपर्दा हो चुकी है और हर देश सवाल कर रहा पाकिस्तान से की क्या सच में उसने अपना सब कुछ बेच दिया है अमेरिका और बाकी दुनिया के ताकतवर देशो के पास .. दुनिया जान रही है की पाकिस्तान कभी भी खुद के दम पर नहीं रहा और कभी अमेरिका तो कभी चीन के कदमो के लोटता रहा .. 

विदित हो की एक सनसनीखेज खुलासे में सामने आया है की संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री नवाबजादा लियाकत अली खान की हत्या कर दी थी। ये खुलासा खुद अमेरिका से हुआ है और वो भी अमेरिका के विदेश विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक.. अमेरिकी विदेश विभाग की इस रिपोर्ट को पाकिस्तान के एक नामी समाचार माध्यम पाकिस्तान टुडे ने शुक्रवार को बाकायदा प्रकाशित भी किया और बताया कि अमेरिकी निगमों के लिए पड़ोसी ईरान में तेल अनुबंधों को सुरक्षित करने के लिए उनके कार्यालय का उपयोग करने से इनकार करने के कारण खान की हत्या कर दी गई थी।

जारी हुई इस अमेरिका इस बात से नाराज हुआ था की खान ने कहा कि वह न तो बेहरान के अधिकारियों के साथ बेईमान उद्देश्यों के लिए अपनी दोस्ती का इस्तेमाल करेंगे और न ही ईरान के व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप करेंगे।

इसके अलावा, खान पाकिस्तान में हवाई अड्डों को खाली करने के लिए वाशिंगटन भी गए थे, जो संयुक्त राज्य अमेरिका सोवियत संघ के खिलाफ उपयोग कर रहा था, जिस पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने पीएम को गंभीर परिणामों के साथ धमकी दी थी। बताया जा रहा है की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को मारने के लिए अमेरिका ने लम्बे समय तक कोई बेहतरीन शूटर खोजा जो उन्हें पाकिस्तान में नहीं मिलिया और इसी की तलाश अमेरिकी अधिकारियो को अफगानिस्तान ले गयी .. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की हत्या के लिए इनाम मुहमाँगा था .. आख़िरकार अफगानिस्तान में  सैयद अकबर नामक एक आदमी को कार्य लेने के लिए पाया और उसे मारने के लिए भी व्यवस्था की।

अकबर ने खान में दो शॉट निकाल दिए जब उन्होंने 16 अक्टूबर, 1951 को रावलपिंडी में कंपनी बाग में अपना भाषण शुरू किया था।

खान को छाती में गोली मार दी गई और उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और वहां रक्त संक्रमण हुआ, लेकिन 56 वर्षीय खान बेमौत मारे गए .. इस खुलासे के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तान की जबरदस्त किरकिरी हो रही और बताया जा रहा की अपने प्रधानमंत्री के हत्यारे देश के कदमो में फिर भी वो किस प्रकार से सारे स्वाभिमान को बेच कर पड़ा रहा . 


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