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संयुक्त अरब अमीरात से 700 करोड़ की मदद की खबर को बनाया जा रहा खाड़ी देशों के प्रेम का हथियार लेकिन ये है असल सच उस पूरी खबर का

इस खबर को पढ़ कर आप सोच में पड़ जाएंगे और विचार करने पर मजबूर हो जायेंगे की आखिर कौन है वो जो फैला रहा है इस प्रकार की वो अफवाहें जो खाड़ी देशो को भारत की जनता की दृष्टि में तो महान और दयालु देश बना रही है लेकिन खुद भारत की ही सरकार को घोषित करवा रही हैं एक ऐसा विलेन जो अपने ही देश के एक बाढ़ प्रभावित प्रदेश को नहीं देखना चाहता है खुशहाल और समपन्न .. 

ज्ञात हो की पिछले कुछ समय से बाढ़ प्रभावित केरल को कई विदेशो देशो ने या तो मदद की या मदद की पेशकश की लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा प्रचार किया गया है खाड़ी देशो का . यद्द्पि इजरायल जैसे देशों ने भी खुली मदद की पेशकश की जिसको किसी भी प्रकार से ज्यादा प्रचार नहीं मिला और कतर आदि देशो की मदद को सबसे ज्यादा प्रचारित किया गया .. इन सबमे एक खबर ये भी वायरल हो रही थी की संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को 700 करोड़ रूपये की मदद की पेशकश की जिसको भारत सरकार ने लेने से मना कर दिया .. इस खबर पर तो तमाम वामपंथी नेताओं ने अपनी त्योरियां भी कस ली और मोदी सरकार को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया था .. पर अब इस मामले में आया है एक नया मोड़ जिसने बदल कर रख दी है वो तमाम अवधारणाएं जो सत्ता को बदनाम करने के लिए चलाई जा रही हैं .

ज्ञात हो की मीडिया सूत्रों से आ रही खबर के अनुसार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में यूएई के राजदूत अहमद अल्बान्ना ने खुद ही कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सरकार ने मदद की राशि का अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई ऐलान नहीं किया है। समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में यूएई के राजदूत अहमद अल्बान्ना ने कहा कि केरल में आई बाढ़ के बाद चल रहे राहत कार्य का आंकलन किया जा रहा है। अभी तक वित्तीय मदद के लिए कितनी राशि का ऐलान किया जाए ये भी तय नहीं किया गया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ऐसा कहा जा सकता है कि यूएई ने 700 करोड़ रुपये का मदद का ऐलान नहीं किया है? इस पर यूएई के राजदूत ने कहा कि हां, ये बिल्कुल सही है। अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। इतना ही नहीं अभी तक इस बारे में कोई अधिकारिक ऐलान भी नहीं हुआ है। इस खुलासे के बाद अचानक ही तथाकथित धर्मनिरपेक्ष तबके में ख़ामोशी छा गयी है और इतना ही नहीं सरकार के साथ साथ भारत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने व् खाड़ी देशो की छवि भारतीयों की नजर में चमकाने की एक ऐसी साजिश सामने आयी है जिसमे मीडिया का एक वर्ग ही कहीं न कहीं सहभागिता करता दिख रहा है . 

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