Breaking News:

चेक गणराज्य का प्रधानमन्त्री निकल गया इजराइल से भी आगे… बोला- “यूरोप बचाना है तो ….”


इस्लामिक मजहबी कट्टरता के खिलाफ सबसे अधिक आक्रामकता से आवाज उठाने वाले मुल्कों की सूची बनाई जाए तो निश्चित रूप से इसमें रूस तथा इजराइल का नाम सबसे उपर होगा. लेकिन इसमें भी इजराइल सबसे अधिक मुखर माना जाता है तथा यही कारण है कि इस्लामिक जगत का सबसे बड़ा दुश्मन इजराइल माना जाता है. लेकिन अब एक और मुल्क ने इस्लामिक कट्टरता के खिलाफ अपनी आवाज मुखर की है तथा न सिर्फ इजराइल के सुर में सुर मिलाया है बल्कि ये मुल्क इजराइल से भी आगे निकल गया है.

मजहबी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाने वाला ये मुल्क है ईसाई बाहुल्य चेक गणराज्य. चेक गणराज्य के प्रधानमन्त्री द्रेज बाबिस ने यूरोप को चेताते हुए कहा है कि यूरोप की मूल पहिचान ईसाइयत है तथा अगर यूरोप को बचाना है तो हमें यूरोप में मुस्लिमों की घुसपैठ को रोकना होगा. चेक प्रधान मंत्री आंद्रेज बबिस ने पराग्वे टीवी चैनल प्राइमा को बताया कि उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के मुस्लिम देशों से अवैध प्रवासन ईसाई नींव के आधार पर यूरोपीय सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है. उन्होंने कहा, “हम चेक गणराज्य में यूरोपीय सभ्यता के लिए खतरे के रूप में मुस्लिमों के अवैध प्रवास को लेते हैं. उन्होंने कहा कि “हम अफ्रीका या मध्य पूर्व में रहने वाले लोगों की तरह अपने घर में. नहीं रहना चाहते हैं. हमें मुस्लिम राज्यों से आप्रवासन रोकना होगा.

चेक गणराज्य के प्रधानमन्त्री अंडे बाबिस ने यूरोपीय संघ के कदम की सराहना की जिसमें कहा गया है कि प्रत्येक देश को विकासशील देशों से शरणार्थियों की कुछ ठोस संख्या स्वीकार करनी चाहिए और उन्हें यूरोपीय क्षेत्र में सहायता करना चाहिए. आंद्रे बाबिस ने कहा कि अगर हम मुस्लिमों के अवैध प्रवास को रोक नहीं पाए तो वास्तविक यूरोपीय सभ्यता पूरी तरह से खतरे में आ जायेगी. चेक प्रधानमन्त्री ने कहा कि अगर हमें अपनी पहिचान बचानी है तो किसी भी हालात में ये अवैध प्रवासन रोकना ही होगा.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...