इस इमरान की जीत पर सबने कहा था कि पाकिस्तान में कट्टरता हारी है… जबकि इसने अब वो किया जो किसी ने नहीं किया था


पिछले दिनों जब पाकिस्तानी असेंबली के चुनाव हुए जिसमें इमरान खान की पार्टी को बहुमत मिला तो कहा गया कि पाकिस्तान में कट्टरता हारी है तथा पाकिस्तान को एक ऐसी सरकार मिली है जो कट्टरपंथ को नहीं बल्कि भाईचारे को बढ़ावा देगी. लेकिन इमरान खान को प्रधानमंत्री बने हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ लेकिन उन्होंने अपना ऐसा रूप दिखाया है तथा वो काम किया है जो पाकिस्तान में आज तक नहीं किया गया. इमरान खान तालिबानी कट्टरवादी राह पर चल पड़े हैं तथा उनकी ओर से नया पाकिस्तान बनाने का दावा उनके प्रधानमंत्री बनने के 15 दिन के अंदर ही खोखला साबित होने लगा है. इमरान खान की सरकार बेहद ही कट्टरवादी तौर तरीके को अमल में लाने लगी है.

आपको बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान ने आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल किए गए प्रिंस्टन विवि के जाने-माने अर्थशास्त्री आतिफ मियां को इस्तीफा देने के लिए कह दिया. आतिफ मियां से इस्तीफा इसलिए मांगा गया, क्योंकि वह अहमदी समुदाय के हैं और चरमपंथी मौलाना-मौलवी इसी कारण उन्हें आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे थे. गौरतलब है कि पाकिस्तान में अहमदी समुदाय के लोगों को मुसलमान नहीं माना जाता. पाकिस्तान के पहले नोबेल विजेता प्रोफेसर अब्दुल सलाम भी अहमदी समुदाय के थे.  आज पाकिस्तान में उनका कोई नाम नहीं लेता। बहुत पहले उनकी कब्र पर उनके नाम के आगे लिखा मुस्लिम शब्द भी खुरच दिया गया था. यह दिलचस्प है कि जब आतिफ मियां को आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल करने को लेकर कट्टरपंथी तत्वों के विरोध के स्वर उभरे थे तो इमरान खान और उनके सहयोगियों ने कहा था कि वे ऐसे तत्वों के आगे नहीं झुकेंगे, लेकिन आखिरकार वे झुक ही गए तथा आतिफ मियां से इस्तीफ़ा मांग लिया गया.

इमरान खान को इसलिए कहीं अधिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि आतिफ को हटाए जाने के विरोध में आर्थिक सलाहकार परिषद के एक और सदस्य एवं हार्वर्ड विवि के प्रोफेसर असीम एजाज ख्वाजा ने भी इस्तीफा दे दिया है. उनके इस फैसले पर अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने फक्र का इजहार किया है. इमरान खान द्वारा आर्थिक सलाहकार परिषद से आतिफ मियां को हटाने के फैसले का विरोध करने वाले यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे ही बनेगा नया पाकिस्तान? लोग पूंछ रहे हैं कि अभी तो इमरान की शुरुआत ही है लेकिन उन्होंने जिस तरह से कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेके हैं वो साफ़ संकेत ददे रहा है कि इमरान खान की सरकार कट्टरपंथियों की कठपुतली है तथा अब पाकिस्तान में वही होगा वहां के कट्टरपंथी चाहेंगे. इमरान के पाकिस्तान में आतिफ की बेइज्जती को अहमदिया समुदाय के लिए एक बड़े संकट के तौर पर देखा जा रहा है. अहमदी समुदाय के लोग यह आशंका जता रहे हैं कि तथाकथित नए पाकिस्तान में उनके उत्पीड़न का चक्र और तेज हो सकता है.  यह निराधार नहीं, क्योंकि इमरान के पीएम बनने के बाद भी अहमदी समुदाय की मस्जिदों पर हमले का सिलसिला कायम है. इससे ये भी संकेत मिलता है कि जब पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों की ये हालात है तो फिर गैर मुस्लिम हिन्दू सिख ईसाई आदि की स्थिति कैसी होगी.


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