इस्लामिक सम्मेलन की आहट पर उबल पड़ा ये देश… पुलिस को रोकना पड़ा जनता को सम्मेलन पर हमला करने से

पिछले कुछ सालों में जिस तरह से दुनियाभर में मजहबी चरमपंथ बढ़ा है उससे कहीं न लोगों लोगों को ये सोचने को मजबूर किया है कि अगर इस कट्टरता को समय रहते नहीं रोका गया तो स्थिति काफी भयावह होने वाली है. मजहबी चरमपंथ के बढ़ते संक्रमण की ये आशंकाएं निर्मूल नहीं हैं क्योंकि सीरिया, लीबिया की स्थिति से पूरी दुनिया वाकिफ है कि वहां की स्थिति क्या है. इसी को देखते हुए हाल ही में चेक गणराज्य के प्रधानमन्त्री आंद्रे बाबिस ने कहा था कि अगर यूरोप की सभ्यता को बचाना है इस्लामिक घुसपैठ को रोकना ही होगा.

ताजा मामला अमेरिका का है जहाँ इस्लामिक सम्मेलन की खबर मिलते ही स्थानीय लोग सडकों पर उतर पड़े तथा सम्मेलन का विरोध ये कहते हुए शुरू कर दिया कि इस ये सम्मेलन शरिया कानून को बढ़ावा देने वाला है, जो उन्हें स्वीकार नहीं है. हथियारबंद ब्लैक पैंथर की मौजूदगी से इस्लामिक सोसाइटी आॅफ अमेरिका के 55वें सम्मेलन में शनिवार को अफरा-तफरी मच गई।.पुलिस को बीच बचाव के लिए आगे आना पड़ा. सम्मेलन के आयोजकों को खबर मिल थी कि कुछ स्थानीय लोग आयोजन स्थल जाॅर्ज आर ब्राउन कन्वेंशन सेंटर के बाहर हंगामा खड़ा कर सकते हैं. इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी. इस्लामिक सम्मेलन के शुरू होते ही स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन करने लगे तथा अंदर घुसने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका में तीन आन्दोलनकारियों को गिरफ़्तार भी किया.

आपको बता दें कि तीन दिवसीय सम्मेलन शनिवार को शुरू हुआ था जिसके बाद टेक्सास पेट्रियट नेटवर्क के करीब एक सौ लोग सुबह से ही कन्वेंशन सेंटर पर जुटने शुरू हो गए थे. इनमें श्वेत अतिवादी के लोग भी थे. ये लोग ‘नाज़ी वापस घर जाओ’ के नारे लगा रहे थे. इस समूह के लोगों का कहना था कि वह मुस्लिम समुदाय को सिर्फ़ एक बात कहना चाहते हैं कि जो भी अमेरिका में हैं, वह एक न एक दिन अमेरिकी नागरिक बनते हैं और उनके लिए सरिया क़ानून छोड़ कर अमेरिकी कायदे- क़ानूनों का पालन करना अनिवार्य होता है. ब्लैक पैंथर के प्रवक्ता क्रिस्टल मुहम्मद ने कहा है कि अमेरिकी संविधान के प्रथम अध्याय के अनुसार सभी धर्मों को अपनी बात कहने का अधिकार है, जिस पर आन्दोलनकारियों का कहना था कि संविधान का लेकर इस्लामिक क़ानून शरिया लागू होने ददिया जाएगा.


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