आखिर क्यों भारत की ईसाई मिशनरियां अचानक ही ऐसे बौखला गई कि उन्हें जारी करने पड़ रहे हैं फतवे ? जानिए असली वजह

*भारत में दबे पाँव बहुत बड़ा परिवर्तन हो रहा है । संभवतः बहुत कम लोगों ने इस परिवर्तन की आहट सुनी है !!*  असल मे ये बदलाव तुष्टीकरण की राजनीति को त्यागने का हो रहा है .. कल पोप का दक्षिण एशिया की यात्रा चल रही है । पोप फ्रांसिस अपने दक्षिण एशिया के दौरे में भारत नहीं आएंगे किन्तु कैथोलिक चर्च के नेता पोप फ्रांसिस ने एक साल पहले कहा था कि वह 2017 में “लगभग निश्चित रूप से” भारत और बांग्लादेश का दौरा करेंगे किन्तु अब पोप के दौरे से भारत गायब है ।

इसका कोई आधिकारिक कारण वैटिकन या भारत सरकार की तरफ से नहीं बताया गया है । कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया के महासचिव बिशप थियोडोर मैसकारेनहांस ने एएफपी से कहा, “पोप हमारे नजदीक में ही आ रहे हैं और भारत नहीं आ रहे हैं. एक भारतीय होने के नाते मुझे इस बात से ठेस लगती है.

इसमें बदलाव जैसा क्या है? *आइये कुछ तथ्यों पर रोशनी डालें🔍*
वैसे तो इशाई धर्म के बहुत से सम्प्रदाय हैं पर चर्च मुख्यतः 2 भागों में बंटा हुआ है.
👉प्रोस्टेंट ( मुख्यतः अमेरिका में)
👉कैथोलिक ( मुख्यतः यूरोप में)
पोप कैथोलिक चर्च के मुखिया और वेटिकन सिटी नामक देश के मुखिया हैं. वह किसी देश में जाते हैं तो उन्हें राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा दिया जाता है. पोप का भारत ना आना मतलब चोर की दाढ़ी में तिनका,.. इस बात की तरफ इशारा करता है कि भारत सरकार के अंदर क्रिश्चियन मिशनरी की दखल कम हुई है ।
मोदीराज मे इसाई मिसनरियों फर्जी NGO पर लगाम लगाई गई है ।।झारखण्ड में धर्मान्तरण विरोधी बिल भी इसी श्रृंखला की एक कड़ी है! राजस्थान में भी एक कड़ा कानून लग गया है जिसमे धर्मांतरण करवाने वाले को जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी ..शायद यही बड़ी वजह है कि पोप भारत नही आ रहे । हिन्दू संगठनों की माना जाय तो अब पॉप के हितैशी नहीं सरकार सत्ता में नही है ।भारत की वर्तमान सरकार व कई प्रदेशों की  सरकार तुष्टिकरण की नीति को त्याग कर सर्वसमाज पर ध्यान केंद्रित कर के चल रही हैं !
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