पाकिस्तान के चुनावों में “मोदी से बचाने” व “मोदी से लड़ने” के नाम पर मांगे जा रहे हैं वोट

न वहां आतंकवाद मुख्य विषय है , न ही गरीबी , न ही अशिक्षा .. मुख्य सभी नेताओं के मुँह पर सिर्फ एक नाम , मोदी .. कोई कह रहा वोट दो , मोदी को सबक सिखाऊंगा , तो कोई बोला कि वो जीत गया तो मोदी पाकिस्तान का कुछ नही कर पायेगा .. कोई कह रहा कि वर्तमान सरकार मोदी से नही निबट पा रही है तो कोई कह रहा है कि अगर वो हार गया तो पाकिस्तान को मोदी से खतरा है .. अजीब प्रकार का चुनाव है ये पाकिस्तान में जिसमे वहां के नेताओं से ज्यादा चर्चा नरेंद्र मोदी की है ..इन सबमे सबसे खास बात ये है कि पख्तून और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में भी जब ये भाषण दिए जाते है तो वहां की सुदूर गांवों में रहने वाली और बिजली ही नही मोबाइल से दूर गरीब जनता भी तालियां बजा कर ये जताती है कि वो नरेंद्र मोदी को जानते हैं ..

25 जुलाई को होने जा रहे पाकिस्तान चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या है? सोचिए ! बिजली, पानी, सड़क, आतंकवाद, या गरीबी…बिल्कुल नहीं। कश्मीर भी इस बार चुनाव लड़ रही किसी भी पार्टी के घोषणा-पत्र में प्रभावी उपस्थिति नहीं दर्ज करा पाया है। दरअसल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी पड़ोसी मुल्क में हो रहे आम चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। स्वभावगत समस्या के चलते वहां की हर बड़ी-छोटी पार्टी पानी पी- पीकर भारतीय पीएम को कोस रही है।

इस कोसने में उनका अपने हुक्मरानों के प्रति एक तंज का भाव है, एक मलाल झलकता है।सबको मोदी से शिकायत है। कोई कह रहा है कि मोदी की सधी हुई विदेश नीति ने पाकिस्तान को वैश्विकमंच पर अलग-थलग कर दिया तो किसी की शिकायत है कि एक अकेला मोदी देखो भारत को कहां पहुंचा रहा है और हमारे यहां लोग अपनी जेबें भरने में जुटे हुए हैं। वैसे तो पाकिस्तानी चुनाव में भारत विरोध हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत विरोध से ज्यादा पाकिस्तान में मोदी विरोध के नाम पर नेता वोट मांग रहे हैं।

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