मुस्लिमों के अधिकार छीनने वाले चीन ने अब नम्बर लगाया है ईसाईयो का.. शुरू किया उनके भी खिलाफ कड़ी कार्यवाही

ये वो कम्युनिस्ट विचारधारा है जो धर्म को जहर के समान मानती है और धर्म को मानने वालों को अपना शत्रु . इस विचारधारा से ग्रसित भारत ही नहीं दुनिया के कई कोनो में लोग मौजूद हैं .. इसके चलते ही पहले इस्लाम मत के खिलाफ झिनझियांग प्रान्त में दमन चक्र चला था और अब पूरे चीन में ईसाइयो के खिलाफ छेड़ दिया गया है कड़े निर्णयों के साथ एक बड़ा अभियान जिसमे निशाने पर चर्च और पादरी भी आ गए हैं .

ध्यान देने योग्य है की मुस्लिमों के बाद कम्युनिस्ट देश चीन में ईसाई मत को मानने वाले लोगों पर अब सरकार की कार्रवाई तेज कर दी गई है। ये कार्यवाही राजधानी बीजिंग सहित कई बड़े शहरो में शुरू हो गयी है जिसमे उस शहर में मौजूद गिरिजाघरों और चर्चों को बंद करा दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहां तक बताया जा रहा है की ईसाइयो की कई पुस्तकों तक को आग के हवाले कर दिया गया है। यह कार्रावाई इसलिए की जा रही है कि आने वाले समय में नास्तिक पार्टी को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हो। यहाँ ध्यान देने योग्य ये है की बता दें कि चीन में अभी 3.8 करोड़ प्रोटेस्टेंट ईसाई हैं। साथ ही यह बताया जा रहा है कि आने वाले समय में चीन ईसाई मत को मामने वाली आबादी सबसे अधिक होंगी। उन्हीं को दबाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। इसी के चलते उनसे एक फार्म साइन कराया जा रहा है

बताया ये भी भी जा रहा है की सरकार की ओर से ईसाई लोगों से एक पेपर पर साइन कराया जा रहा है जिसमें कहा गया है कि वे किसी मत या मज़हब के मानने वाले नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा के लोग हैं .. चीन के कुछ पादरियों ने मीडिया को यह जानकारी दी है, उन्होंने बताया की चीन अब किसी भी मत या मज़हब को मानने वालों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है . सबसे बड़ी बात ये है की किसी भी तथाकथित समाजसेवी , मानवाधिकारवादी या बुद्धिजीवी वर्ग ने अब तक चीन के इस दमन के खिलाफ आवाज नहीं उठाई है . आपको बता दें कि पिछले दिनों सरकार ने मुस्लिम धर्म को पर कार्रवाई करते हुए मस्जिद गिराने के भी आदेश दिए थे। कम्युनिष्ट पार्टी की सरकार ने जिन किताबों पर क्रोस के चिंह लगे हुए थे। उन्हें नष्ट करा दी गई है। धर्मों की निगरानी करने वाली एक संस्था ने बताया कि ईसाइयों को अपना धर्म छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है,

 

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