हिन्दुओं के बाद अब न्याय की ह्त्या हो रही पाकिस्तान में… जज ने बताया ISI का फरमान तो काँप गया पाकिस्तान

ये पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का सरेआम कत्लेआम होता है. खासकर हिन्दुस्तान एक कारण हिन्दुओं की हत्याएं की जाती हैं. लेकिन ये जानकर आपको आश्चर्य होगा कि पाकिस्तान में हिन्दू ही नहीं बल्कि न्याय की भी ह्त्या हो रही है. पाकिस्तानी जज ने ऐसा खुलासा किया है जिससे पूरा पाकिस्तान काँप गया है. इस्लामाबाद हाई कोर्ट के एक जज ने शनिवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों पर मनमुताबिक फैसला देने के लिए दबाव डालती है. जज का यह आरोप भी है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित कई अन्य मामलों पर भी जजों पर दबाव बनाया गया तथा अभी भी ISI नवाज शरीफ को जेल से बहार न आने का दवाब न्यायपालिका पर बना रही है.

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार मामले में शरीफ को 10 साल और उनकी बेटी मरयम को 7 साल कैद की सजा सुनाई गई है. दोनों को लंदन से पाकिस्तान पहुंचने पर 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जज शौकत सिद्दीकी ने रावलपिंडी बार एसोसिएशन में कहा कि आज न्यायपालिका और मीडिया ‘बंदूकवालों (सेना)’ के नियंत्रण में है. न्यायपालिका जहां स्वतंत्र नहीं है वहीं मीडिया को भी सेना की तरफ से दिशानिर्देश मिलते हैं. इसी दबाव की वजह से मीडिया सच नहीं बोल सकता. उन्होंने कहा कि ISI  मनमुताबिक निर्णय के लिए बेंच का निर्धारण कराती है. आइएसआइ ने ही चीफ जस्टिस से कहा था कि 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव से पहले नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरयम जेल से बाहर नहीं निकलने चाहिए. इतना ही नहीं एजेंसी ने शरीफ और मरयम के मामले को सुनने वाली बेंच में मुझे शामिल नहीं करने को भी कहा था. इस पर चीफ जस्टिस ने उनके मुताबिक बेंच बनाने को कहा था.

पाकिस्तानी जज सिद्दीकी ने यह भी कहा कि उन्हें आइएसआइ ने सहयोग करने पर चीफ जस्टिस बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया. जज ने कहा, ‘न्यायपालिका और मीडिया दोनों ही जनता की आवाज होती हैं. अगर इनकी स्वतंत्रता पर कुठाराघात होता है तो पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश नहीं रह जाएगा. देश के 70 सालों के स्वतंत्र इतिहास में हमने आधे समय सैन्य शासन देखा है पर आज न तो पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र है और न ही लोकतांत्रिक राष्ट्र है बल्कि ISI का राष्ट्र है जहाँ उनका आदेश न मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं.

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