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रोहिंग्या आतंकियों के बाद अब म्यांमार में बारी आयी आतंक परास्त पत्रकारों की.. २ पत्रकार ७ साल के लिए जेल की सलाखों के अंदर

मजहबी चरमपंथ के खिलाफ, इस्लामिक आतंक के खिलाफ अभी तक सबसे अधिक आक्रामक कार्यवाही करने वाले देशों का नाम लिया जाता था तो उसमें इजराइल तथा रूस का नाम प्रमुखता से लिया जाता था. लेकिन अब इस सूची में म्यांमार का नाम भी जुड़ गया है. रोहिंग्या आतंकियों का संहार करके इस्लामिक जगत सहित तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगों की आँखों की किरकरी बने म्यांमार में रोहिंग्या आतंकियों के बाद अब बारी आयी है उन आतंक परस्त पत्रकारों की जो रोंहिंग्या आतंकियों की पैरोकारी कर रहे थे. आपको बता दें कि म्यांमार ने रोहिंग्या आतंकियों के हमदर्द 2 पत्रकारों को 7 साल के लिए जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया है.

खबर के मुताबिक़, म्यांमार की एक अदालत ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकारों को सात साल की जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने रोहिंग्या संकट की कवरेज करने के दौरान गिरफ्तार किए गए समाचार एजेंसी रॉयटर्स के दो पत्रकारों को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (शासकीय गोपनीयता अधिनियम) का उल्लंघन करने का दोषी पाया है.  दरअसल, पत्रकार वा लोन (32) और क्याव सोए ओ (28) रखाइन प्रांत में रोहिंग्या नरसंहार की रिपोर्टिंग कर रहे थे, जिसके बाद दोनों को दिसंबर 2016 में गिरफ्तार किया गया तथा तथा उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. मामले में यंगून कोर्ट के जज ये ल्यून ने कहा कि दोनों पत्रकारों ने देश के उद्देश्यों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है, जिसकी वजह से उन्हें सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है. कोर्ट ने कहा, ‘चूंकि उन्होंने गोपनीयता कानून के तहत अपराध किया है, दोनों को सात-सात साल जेल की सजा सुनाई जा रही है.

आपको बता दें कि इन पत्रकारों को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे रोहिंग्या नरसंहार के एक मामले की जांच कर रहे थे.  पत्रकार ला लोन और क्याव सोई ओ दिसंबर से म्यांमार की जइनसेनी जेल में बंद हैं.  दोनों को यंगून में पुलिस ने खाने पर आमंत्रित किया गया था और रेस्टोरेंट से निकलने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था. उन पर रखाइन राज्य के बारे में वर्गीकृत दस्तावेज रखने के मामले में औपनिवेशिक युग के गोपनीयता कानून के उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया, जिसमें अधिकतम 14 साल की सजा होती है. मामले में बचाव पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने एक षड्यंत्र के तहत उन्हें गिरफ्तार किया है तथा म्यांमार में ये प्रेस की आजादी पर हमला है. इससे पहले अदालत की ओर से दोनों की कई जमानत याचिकाओं को रद कर दिया गया है.  ऐसे में दोनों अपनी गिरफ्तारी दिसंबर 2017 से ही जेल में हैं.

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