अमेरिकी एजेंसी का दावा- “2050 तक ईसाईयों को भी पछाड़ देगी मुस्लिम आबादी, सबसे ज्यादा मुसलमानो का देश होगा भारत”.जानिए क्या होगा हिंदुओं का हाल ?

जिन तथ्यों को सुदर्शन न्यूज़ पूरे प्रमाणिक आंकड़ों से पिछले लंबे समय से बता रहा है उन आंकड़ों पर आखिरकार संसार ने अपनी मुहर लगा ही दी और अब चर्चा सिर्फ भारत ही ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की होना शुरू हो गयी ..असल मे एकतरफा बढ़ती मुस्लिम आबादी ऐसा असन्तुलन है जिस से भारत तो दूर अब संसार की सबसे बड़ी शक्ति अमेरिका भी चिंतित हो उठा है ..
विदित हो कि दुनिया की शीर्षतम हस्ती अमेरिका भी अब एकतरफा बढ़ती आबादी से चिंतित हो उठा है  . अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध आबादी पर रिसर्च करने वाली संस्था PEW का साफ साफ सार्वजनिक रूप से दावा है कि 2050 तक इस दुनिया की ईसाई आबादी को बहुत पीछे छोड़ देगी मुस्लिमों की जनसँख्या क्योंकि 2050 तक मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर तेजी से बढ़ कर 73 पर्सेंट तक हो जाएगी जिसके बाद ईसाई पीछे रह जाएंगे मुस्लिमों की आबादी से ..
ध्यान रखने योग्य है कि भारत मे लगभग 15 प्रतिशत होने के आधिकारिक दावा है मुस्लिम आबादी का जबकि दुनिया की पूरी जनसंख्या में मुसलमानों का 23 पर्सेंट हिस्सा है ..वर्तमान में संसार मे सबसे अधिक आबादी ईसाईयों की है लेकिन रिसर्च एजेंसी PEW ने कहा कि 2050 तक इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा मज़हब बन जाएगा। एजेंसी PEW ने ये आंकड़े पिछले साल हुई एक पॉपुलेशन रिसर्च के आधार पर दिए जिसमे मुस्लिम आबादी न केवल भारत मे अपितु संसार मे सबसे अधिक तेजी से बढ़ रही है ..
आंकड़ो के अनुसार भले ही दुनिया मे वर्तमान समय मे  240 करोड़ से ज्यादा ईसाई हैं और मुस्लिम जनसँख्या 160 करोड़ की है लेकिन 2050 तक मुस्लिमों की जनसँख्या 73 प्रतिशत तक हो जाएगी और ईसाईयों सम्प्रदाय दूसरे नम्बर पर आ जायेगा .  आंकड़ो की माना जाय तो हिंदुत्व संसार के तीसरे स्थान पर कायम है जिसकी आबादी डर मुस्लिमों से आधे से भी कम लगभग 35 प्रतिशत रह जायेगी जब अभी 23 प्रतिशत की दर से बढ़ता इस्लाम 2050 तक 73 प्रतिशत की दर से बढ़ने लगेगा ..
इसी मुद्दे पर इस रिसर्च एजेंसी का दावा है कि भले ही इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या इंडोनेशिया में पाई जाती है, लेकिन 2050 में भारत इस मामले में नंबर वन बन जाएगा..रिसर्च के मुताबिक आने वाले समय में अन्य धर्मों में इतने व्यापक बदलाव देखने नहीं मिलेंगे। जबकि बताया जाता है कि बौद्ध धर्म में -3 से -7 पर्सेंट तक की गिरावट संभव है। 
 
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