आखिर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने क्या कहा था मुस्लिम महिलाओं को जो उन्हें मांगनी पड़ी है माफी

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने देश की महिलाओं को ही शक्तिहीन बोल दिया। उनके मुताबिक जो हिजाब पहनती हैं वे हीन होती हैं।

आपको बता दे कि अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अपने कुछ सरकारी अधिकारियों को इस्लामिक स्टेट के संबंध में प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा था

कि आरोप लगाने वालों को सबूत पेश करने चाहिए, वरना महिलाओं की चादर पहन लेनी चाहिए ।

इसके बाद बहुत सारे लोगों ने इसे सेक्सिस्ट टिप्पणी मानते हुए

इसकी निंदा की थी। बाद में राष्ट्रपति ने आहत हुई महिलाओं को संबोधित करते हुए माफ़ी मांगी और कहा कि उनकी बात को ग़लत समझा गया ।
अफ़ग़ानिस्तान राष्ट्रपति दफ़्तर के एक आधिकारिक ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति महिला अधिकारों के समर्थक हैं और उन्होंने अफ़ग़ान राष्ट्रपति के तौर पर अपने

कार्यकाल में महिलाओं की स्थिति मज़बूत करने के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं।

बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने ‘चादर’ शब्द का इस्तेमाल किया था । जिसकी ग़लत व्याख्या की गई है बयान में लिखा है कि यह एक आम कहावत है,

जिसका अर्थ देश में महिलाओं की अति महत्वपूर्ण स्थिति को आहत करना कतई नहीं है। सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर उनकी कड़ी निंदा

की और साथ ही इनसे माफ़ी की मांग की । कुछ सरकारी अधिकारियों और महिला सांसदों ने भी इस बयान पर नाराज़गी जताई।

महत्वपूर्ण बात यह है कि

अफ़ग़ानिस्तान एक मुस्लिम देश है जहां ज़्यादातर महिलाएं हिजाब पहनती हैं। अफ़ग़ानिस्तान में महिला लेखकों का सहयोग करने वाली संस्था ‘फ़्री विमेन राइटर्स’

ने राष्ट्रपति ग़नी की बात का फेसबुक पर जवाब भी लिखा। उन्होंने लिखा, कि अफ़ग़ानी महिलाओं के लिए उम्मीद कौन बनेगा, जब उनके अपने राष्ट्रपति सोचते

हैं कि महिला होना शर्म की बात है। महिला सांसद फौज़िया कूफ़ी ने ट्वीट किया कि उन्हें हिजाब पहनने पर गर्व है ग़नी ने 2014 में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति

के तौर पर शपथ ली थी, जिसके बाद उन्होंने भ्रष्टाचार से सख़्ती से निपटने का वादा किया था इससे पहले वह देश के वित्त मंत्री रहे हैं और विश्व बैंक के लिए

भी काम कर चुके है।

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