किसने उठाया नोबेल पुरस्कार पर सवाल ? किसने कहा कि नोबेल शायद अब लश्कर के आतंकियों को दिए जाएँ


भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक तथा वामपंथी विचारधारा के अभिजीत बनर्जी को नोबेल मिलने के बाद भारत में राजनैतिक गहमागहमी बढ़ गई है. कांग्रेस सहित विपक्षी तथा कथित लिबरलों ने जहां अभिजीत बनर्जी के बयानों को आधार पर बनाकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है तो वहीं इसके जवाब में मोदी समर्थकों ने भी उलट वार करते हुए अभिजीत बनर्जी की निष्ठा और नोबेल के लिए चयन पर सवाल खड़ा किया है.

सवाल यहाँ सिर्फ अभिजीत बनर्जी की निष्ठा पर नहीं हैं बल्कि सवाल नोबेल पुरस्कार पर ही हैं उठ रहे हैं. सबसे बड़ा हमला चिंतक और लेखिका मधु किश्वर ने बोला है. उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं नोबेल पुरस्कारों की घोषणा करती हैं, उनकी फंडिंग आतंक को बढ़ाने वाले देशों से होती है. उन्होंने कहा है कि ऐसे में आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आने वाले सालों में लश्कर आतंकियों तथा हुर्रियत के अलगाववादी नेताओं को भी नोबेल पुरस्कार दिया जाए.

इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च की चेयर पर्सन मधु किश्वर ने नोबेल पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि नोबेल पुरस्कारों के पीछे काम करने वाली संस्था फोर्ड फॉउंडेशन का न सिर्फ सीआईए से संबंध है, बल्कि नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी सउदी अरब से वित्त पोषित अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब के संस्थापक हैं. ऐसे में सऊदी का पैसा और फोर्ड फॉउंडेशन ही नोबेल के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

मधु किश्वर ने इस खुलासे के आधार पर यहां तक कह दिया है कि सऊदी और सीआईए के लिंक की वजह से कल को अगर हुर्रियत और लश्कर-ए-तैयबा को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिल जाए तो बड़ी बात नहीं होगी.  उन्होंने कहा कि यदि फोर्ड फॉउंडेशन दो हजार आरटीआई दाखिल कर अरिवंद केजरीवाल के लिए मैगसेसे खरीद सकता है तो अभिजीत बनर्जी को नोबेल मिलना कौन सी बड़ी बात है.


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