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यूरोपीय देशों ने सीमाओं पर खड़े कर दिए सैनिक तो मुस्लिम देशों में घुसना शुरू किए लाखों इराकी व सीरियाई कथित शरणार्थी

वो भले ही दुनिया को सेक्युलर होने की सलाह देते हों पर खुद उनका सेकुलरिज़्म से दूर दूर तक कोई भी लेना देना नही है ..उन्होंने अपनी सीमाओं पर सैनिक खड़े कर के साफ निर्देश जारी किया कि इधर से एक भी सीरियाई या इराकी पार न कर पाए और उन सैनिको ने भी इस आदेश का कड़ाई से पालन किया .. यद्द्पि शुरुआत में उन्होंने दया दिखाई थी पर उसके बदले उन्हें फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन जैसे नरसंहार देखने को मिले और उसके चलते ही धीरे धीरे उनका धैर्य समाप्त होता चला गया ..

यद्द्पि उन्होंने पर उपदेश कुशल बहु तेरे के सिद्धांत को जारी रखा और रोहिंग्या व बंगलदेशियो के लिए मीठी मीठी सलाह जारी रखी..ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें से एक भी उनके देश मे आने में सक्षम नही था और इसका पूरा कुप्रभाव हिंदुओं और बौद्धों पर पड़ रहा था .. विदित हो कि ईसाई बहुल यूरोप के देशों की कढ़ाई और सख्ती के बाद अब सीरिया और इराक से भागे शरणार्थियों ने रुख किया है इस्लामिक मुल्कों का और सबसे पहले उन्होंने पनाह ली है मुस्लिम देशों की एकता का आह्वान करते तुर्की में.. वो तुर्की जिसको विकसित देश मान कर बाकी तमाम इस्लामिक मुल्कों को उस से शिक्षा लेने के लिये कभी कहा जाता था ..

तुर्की सरकार और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, 2018 के अंत में तुर्की में 3.6 मिलियन से अधिक सीरियाई शरणार्थी पंजीकृत थे; सबसे अधिक उम्र 18-56 के बीच है,जिन लोगों को नागरिकता दी गई है.. तुर्की के आंतरिक मंत्री सुलेमान सोयलू ने कहा की तुर्की ने लगभग 76,000 सीरियाई शरणार्थियों को नागरिकता दी है,मिडिल ईस्ट मॉनिटर के मुताबिक, हैबर्उर्क चैनल के साथ एक साक्षात्कार में, सोइलु ने कहा कि 62 प्रतिशत सीरियाई शरणार्थी जो संकट की शुरुआत के बाद से तुर्की आए थे, वे अलेप्पो, इदलिब, रक्का और हसाका के उत्तरी गवर्नरों से आए थे।

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