चीख- चीख कर बता रही सोनिया.. इंसान नहीं हैवान हैं अरब के शेख


देश के प्रांतो में आज भी गरीबी और मज़बूरी ने लोगो को देश से बाहर जाना पड़ता है और बाहर जाकर वे गुलामी के जंजीरो में बंध जाते है। उनकी जिंदगी नर्क से

भी बतर हो जाती है और उनकी पूरी जिंदगी शेख़ जैसे हैवानो के चुंगल में फ़स जाती है। जो यह सोचकर जाती है कि उनकी और परिवार की जिंदगी बेहतर हो

जाएगी। लेकिन उनके सारे सपने चुर चुर हो जाते है। विदेशी एजेंट किस तरह से थोड़े से पैसे के लालच में देश की महिलाओ को नौकरी लालच देकर उन्हें सऊदी

अरब के शेखो को बेंच देते है। ऐसा ज्यादतर पंजाब के आसपास प्रांतो में होता है।

ऐसा ही मामला फिल्लौर (भाखड़ी) का जहां पर विदेश मंत्रालय की मदद से सऊदी अरब से अपने बतन लौटी 40 वर्षीय महिला सोनिया ने कहा कि सऊदी अरब में

इंसान नहीं राक्षस बसते हैं। वहां के लोग गुलामों से भी बुरा व्यवहार करते हैं और महिलाओं से रोजाना 18 घंटे काम लेते हैं। बीमार होने पर लोहे की रॉडों से

पिटाई की जाती है और चोरी से खाना खाते पकड़े जाने पर 3 दिन भूखा रख कर पीटते हैं। महिला अपने देश लौटी सोनिया पत्नी लाल चंद वासी गांव अट्टी का

अपने शहर फिल्लौर पहुंचने पर ‘आप’ के हलका इंचार्ज सरूप सिंह कडियाना, जिंदर संधू, समाज सेवक महेश टोनी, अमरीक जज्जा और शहर वासियों ने गुलदस्ते

भेंट कर सम्मान किया।

बतादें कि महिला अपने घर लौटते पर अपने बेटियों को गले लगाकर फुट फुट कर रोने लगी और अपने बतन की मिट्टी को माथे लगा कर सोनिया ने कहा कि

अरब कंट्री जाने वाले लोग खासकर महिलाएं सोच समझ कर फैसला लें, क्योंकि सऊदी अरब के शेख इंसान नहीं हैवान हैं। सोनिया ने बताया कि उसकी 3 बेटियां

बड़ी 19 वर्ष शादीशुदा और 2 छोटी 12 व 11 वर्ष हैं। पूरे परिवार का पालन-पोषण करने वाले उसके पति लाल चंद की गत वर्ष दुर्घटना में दोनों टांगें टूट गईं जिस

कारण बच्चों के पालन-पोषण और 2 वक्त का खाना खाने के भी लाले पड़ गए। उसके नजदीकी गांव की महिलाएं जो विदेश दुबई गई थीं, उनकी बातों में आकर

दोनों बेटियों की पढ़ाई और परिवार के पालन-पोषण की खातिर उसने भी दुबई जाने का मन बना लिया।

उन्हीं महिलाओं द्वारा बताई गई दिल्ली की रहने वाली नेहा

नामक महिला एजैंट के वह सम्पर्क में आ गई। उसने 60 हजार रुपए ब्याज पर पकड़ एजैंट नेहा को दिए और इसी वर्ष अगस्त में वह सऊदी अरब पहुंच गई।

गौरतलब हैं कि सोनिया ने बताया कि जब वह मालिक अब्दुल अजीज के 3 मंजिला महलनुमा घर पहुंची तो उसे लगा कि वह स्वर्ग में आ गई है परंतु उसे बाद में

पता चला कि स्वर्गनुमा दिखने वाला यह महल नर्क से भी बदतर है। 3 मंजिला महल में 13 लोग रहते थे जिसमें 12 कमरे बने हुए थे प्रात: 5 बजे से लेकर रात

के 2 बजे तक घर की सफाई और उनके खाना बनाने में समय निकल जाता। 3 घंटे सोने के बाद उसे फिर उठा दिया जाता। उसे काम करते नींद न आए इसलिए

मात्र 1 समय दोपहर को खाना खाने को मिलता।

भूख लगने पर अगर वह चोरी से खाना खाते पकड़ी जाती तो उसे बुरी तरह से मारते-पीटते और सजा के तौर पर

3 दिन भूखा रख कर काम पर लगाते। अगर गलती से वह बीमार पड़ जाती तो दवाई की जगह उसे लोहे की रॉडों से पीटते। सोनिया ने कहा कि उसने ऐसी

भयानक जिंदगी से छुटकारा पाने के लिए मरने की बात भी सोची। सोनिया ने फ़ोन और अपने पति के दोस्त के मदद से शेख़ की चुगल से निकली और उसके

पति ने ‘आप’ के हलका इंचार्ज सरूप कडियाना की मदद से एम.पी. भगवंत मान से बात की। भगवंत मान ने विदेश मंत्रालय पर दबाव बनाया जिसकी बदौलत

आज सोनिया अपने घर अपने परिवार में सही सलामत पहुंच सकी।

सोनिया ने बताया कि जब उसके मालिकों को पता चला कि उसके परिवार वालों ने विदेश

मंत्रालय के पास उसकी रिहाई की शिकायत की है तो पहले उसके मालिक ने उसके पति को फोन कर कहा कि वह उसके 5 लाख रुपए वापस लौटाए जिसे देकर

उसने उसकी पत्नी को खरीदा था। विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप से सोनिया सही सलामत अपने देश भारत पहुंची। पेट की भूख ने सोनिया जैसी महिला को शैख़ का

गुलाम बना दिया। कहते हैं देर अंधेर नहीं है और हर चीज का अंत होता है। हर रात के बाद एक नया सवेरा। सुदर्शन परिवार विदेश मंत्रालय को सलाम करती है

जिन्होंने सोनिया को अपने परिवार से मिला दिया। 


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