म्यन्मार के बौद्धों से ज्यादा मजबूत निकले वहां के सेना अधिकारी.. अमेरिका ने लगाया मुसलमानों के नरसंहार पर बैन तो दिया ये जवाब

ऐसा लगा कि वहां हर कोई विराथू है , ये वो देश है जो पिछले कुछ समय से तमाम इस्लामिक मुल्को के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र संघ की चेतावनी और निशाने पर चल्र रहा है, इसके पास न ही बहुत बड़ी सेना है , ही विशाल राजकोष खजाना और न ही बहुत ज्यादा संसाधन लेकिन इसकी मजबूती ने अमेरिका तक को हैरान कर दिया है .. इसकी सबसे बड़ी मजबूती यहाँ के शासन , प्रशासन और जनता का एक मत पर हो जाना है और वो मत था कि देश की सुरक्षा .

ध्यान देने योग्य है कि उसी मत पर कभी आन सान सू ची ने भी अपने कदम बढाये थे और मलाला जैसी एक पक्षीय सोच वाली महिलाओं के तमाम बार उकसाने के बाद भी अपने देश की आंतरिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए म्यन्मार के अंदर आतंक मचा रहे रोहिगया को निकाल फेंकने का समर्थन किया था.. उसके बाद ईसाइयों ने पोप ने भी रोहिग्या कैम्प में मुलाक़ात की थी जिसके बाद माना जा रहा था कि म्यन्मार पर दबाव बनेगा.. पर म्यन्मार वही करता रहा जो उसे सही लगा .

अब ताज़ा जानकारी के अनुसार अमेरिका ने म्यांमार सैन्य बलों के कमांडर-इन-चीफ तथा तीन अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारियों पर अल्पसंख्यक समुदाय रोहिंग्या के सदस्यों की गैर-न्यायिक हत्या करने के कारण प्रतिबंध लगा दिया है। समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र विशेष आयोग की पिछले साल रिपोर्ट आई थी जिसमें सैनिकों और आतंकवादी संगठनों द्वारा रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई को मानवता के खिलाफ हमला कहा था। उस रिपोर्ट की प्रतिक्रिया में अमेरिका ने पहली बार इतने कठोर प्रतिबंध लगाए हैं।

इन प्रतिबंधो के लगने से म्यन्मार के सैनिक अधिकारी ज़रा सा भी विचलित नहीं दिखे और वो अपने किसी कार्य को गलत नहीं मानते हुए इस बात पर अड़े है कि उनके देश के लिए जो भी उचित होगा वो उसको करेंगे ..  ये प्रतिबंध जनरल मिन ओंग हेंग (राष्ट्रीय सेना के कमांडर इन चीफ) और उनके बाद सर्वोच्च नेता सू विन के साथ-साथ 33वीं लाइट इनफेंटरी डिवीजन के ब्रिगेडियर जनरल औंग औंग और 99वीं इनफेंटरी डिवीजन में उनके समकक्ष थान ओ पर लगाए गए हैं।

 

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